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Monday, 11 February 2013 11:32 |
अंबरीश कुमार, लखनऊ। अखिलेश सरकार ने मंत्रिमंडल में फेरबदल में कई मंत्रियों के पर कतरे तो कई को संदेश भी दे दिया। देर रात हुए मंत्रिमंडल फेरबदल में उन मंत्रियों का भार हल्का किया गया जिन्हें लेकर सवाल उठ रहे थे।
अभी कई मंत्री बच भी गए लेकिन वे कतार में हैं। राजा महेंद्र अरिदमन सिंह से मलाईदार परिवहन विभाग ले लिया गया है जिसका पिछले दिनों काफी दोहन किया गया था। दूसरे राजा रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया से जेल विभाग लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उभरते हुए जाट नेता और कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी को थमा दिया गया। जेल से राजेंद्र चौधरी का सिर्फ एक रिश्ता जगजाहिर है कि इस मंत्रिमंडल में वे उन गिने-चुने मंत्रियों में शामिल हैं जो आपातकाल के दौरान तो पूरे समय जेल में रहे ही साथ ही उससे पहले और बाद में आंदोलनों में जेल जाते रहे। इसलिए उन्हें जेल दिए जाने पर राजनीतिक हलकों में हैरानी जरूर हुई क्योंकि वे पिछले कुछ सालों से समाजवादी पार्टी और मीडिया के बीच सेतु बने हुए हैं। महेंद्र अरिदमन सिंह से परिवहन लेकर दुर्गा प्रसाद यादव को दे दिया गया है। इसी तरह एक और कद्दावर मंत्री ओमप्रकाश सिंह से भूमि विकास और जल संसाधन व परती भूमि जैसे विभाग लेकर उन्हें पर्यटन विभाग दे दिया गया है। इसी तरह पारसनाथ यादव से लघु सिंचाई और पशुधन विभाग ले लिया गया तो राजकिशोर सिंह से उद्यान विभाग लेकर एक-दूसरे से अदला-बदली कर दी गई है। यह फेरबदल अखिलेश यादव ने मंत्रियों को राजनीतिक संकेत और चेतावनी देने के लिए किया है जो फिलहाल
सांकेतिक है पर यह बता दिया गया है कि मंत्रियों के कामकाज और आचरण की खबर उन्हें है। मुलायम सिंह यादव लगातार आगाह कर रहे थे कि कई मंत्री गड़बड़ कर रहे हैं। वे सुधर जाएं। शनिवार को तो मुलायम सिंह ने काफी तल्ख शब्दों में कहा-कई मंत्रियों ने तो अपना चुनावी घोषणा पत्र तक नहीं पढ़ा है। कम से कम मंत्री बनने के बाद तो पार्टी का घोषणा पत्र पढ़ लेना चाहिए ताकि जो वायदे किए गए हैं उन्हें शुरू के दो सालों में ही पूरा किया जा सके। फेरबदल से पहले उम्मीद थी कि कुछ मंत्री हट भी सकते हैं। लेकिन लोकसभा चुनाव के कारण सत्तारूढ़ दल किसी तरह के अंदरूनी विवाद से बचता हुआ नजर आ रहा है। इसलिए यह सांकेतिक फेरबदल किया गया है। सरकार के कई मंत्रियों पर पैसे के लेनदेन के आरोप लग चुके हैं और विपक्ष भी सार्वजनिक रूप से तबादला और तैनाती में पैसा लेने के आरोप लगा चुका है। परिवहन विभाग इसमें ऊपर था जहां पूर्वांचल में एक आरटीओ की तैनाती के लिए दो करोड़ का लेन-देन चर्चा में आया। इसी तरह गाजियाबाद में आवास विकास परिषद के एक आवास अधिकारी की खुलेआम पचास हजार घूस मांगने की शिकायत खुद एक मंत्री ने सचिव से की हो तो सरकारी कामकाज के ढर्रे को समझा जा सकता है। भाकपा लगातार यह कह रही है कि पांच हजार करोड़ का खाद्यान घोटाला हो चुका है। लेकिन इसे लेकर सत्तारूढ़ दल गंभीर नजर नहीं आ रहा है। अगर अभी सरकार ने ऐसे मंत्रियों को और नहीं कसा तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की छवि पर दाग लग सकता है।
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