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पीएम प्रत्याशी तय करना हमारा काम नहीं: भागवत PDF Print E-mail
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Friday, 08 February 2013 18:36

होशंगाबाद। उन्होंने मोदी के पीएम पद की उम्मीदवारी को लेकर पूछे गए सभी सवालों को टाल दिया।

आरएसएस के मुखिया मोहन भागवत ने कहा है कि भाजपा के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार तय करना हमारा काम नहीं है।  नर्मदा नदी के तट बां्रदाभान में तीसरे अंतरराष्ट्रीय नदी महोत्सव का उद्घाटन करने आज यहां आए भागवत ने संवाददाताओं द्वारा गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर पूछने पर कहा, ह्यह्यप्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार चुनना मेरा ह्यजाबह्ण नहीं है और ऐसी बातें करने के लिए यह उचित मंच भी नहीं है।

इससे पहले नदी महोत्सव का उद्घाटन करते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि नेता ऐसा होना चाहिए, जो आज के बारे में सोचे, क्योंकि उसकी कही बातों को लोग पचास-सौ साल बाद समझें, तो उसका कोई औचित्य नहीं है।
उन्होने नदियों की महत्ता रेखांकित करते हुए कहा कि यदि तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो निश्चित रूप से वह पानी को लेकर ही होगा और ऐसा हुआ, तो मानव जाति का विनाश निश्चित हैै। पृथ्वी पर पीने योग्य मीठा पानी मात्र एक प्रतिशत है, जिससे मानव जाति का जीवन चलता है। हमें उसका सोचा-समझा उपयोग सुनिश्चित करना होगा, तभी इस तीसरे विश्वयुद्ध से बचा जा सकता है।
भागवत ने कहा कि हमें नदियों को बचाने और उन्हें संरक्षित करने के भागीरथी प्रयास करने होंगे।
उन्होने कहा कि मनुष्य के हाथ में विज्ञान रूपी एक ऐसी दोधारी तलवार लग गई है, जो कम समय में उसकी जरूरतें


पूरी करने का साधन बनकर रह गया है। मनुष्य ने अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए पृथ्वी के भंडार को खत्म करना शुरू कर दिया है, जिससे वह खाली होने के कगार पर आ गया है।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि मनुष्य को जीवन के उस तरीके पर लौटना होगा, जिसमें वह प्रकृति से जितना लेता था, उससे कहीं अधिक उसे लौटाता भी था। चूंकि हमारी दृष्टि बदल गई है, इसलिए हम आज विनाश के मुहाने आकर खड़े हो गए हैं। जरूरत इस बात की है कि हमें अब विकास के साथ आने वाली पीढ़ियों के बारे में भी गंभीरता से विचार करना होगा।
इस अवसर पर महोत्सव के आयोजनकर्ता गैर सरकारी संगठन ह्यनर्मदा समग्रह्ण के सचिव अनिल माधव दवे ने बताया कि इस आयोजन में उन लोगों को आमंत्रित किया गया है, जिनका नदियों से सीधा संबंध है। इसमें केरल, असम, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात सहित एक दर्जन से अधिक राज्यों तथा चार अन्य देशों के 850 से अधिक लोग हिस्सा ले रहे हैं। उन्होने कहा कि नर्मदा नदी के प्रति यदि भविष्य में भी हमारा यही व्यवहार रहा, तो इसे भी यमुना नदी की तरह होने में देर नहीं लगेगी, जिसका पानी पीना तो दूर कोई उसमें नहा भी नहीं सकता है।
संगठन के अध्यक्ष अमृतलाल वेगड़ ने कहा कि पर्यावरण से हम जिस प्रकार खिलवाड़ कर रहे हैं, उससे नदियों का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा। आज हमारी नदियों की जो हालत है, उसके पीछे जनसंख्या विस्फोट भी एक बहुत बड़ा कारण है। (भाषा)

 

 

Last Updated on Saturday, 09 February 2013 10:31
 
 

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