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Friday, 08 February 2013 12:04 |
नयी दिल्ली। कोर्ट ने 2006 में एक नाबालिग लड़की के साथ अपहरण और बलात्कार के मामले में पेश होने में नाकाम रहने के बाद आज कांग्रेस सांसद महाबल मिश्रा और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ ताजा सम्मन जारी किए।
महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों की सुनवाई के लिए गठित फास्ट ट्रैक अदालत ने मिश्रा, उनकी पत्नी उर्मिला, पत्नी किरण और भाई हीरा मिश्रा को सुनवाई की अगली तारीख 18 फरवरी को अपने समक्ष पेश होने का निर्देश दिया । अदालत ने मिश्रा और उनके परिवार के सदस्यों को आज व्यक्तिगत तौर पर पेशी से छूट दे दी । उनके वकील ने अदालत को सूचित किया कि पूर्व में जारी किए गए सम्मन उन्हें मिले नहीं क्योंकि वे दिल्ली में नहीं हैं । वकील ने अदालत को बताया कि उनकी गैर हाजिरी ‘जानबूझकर’ नहीं थी क्योंकि उन्हें पूर्व में जारी किए गए सम्मन के बारे में मीडिया के माध्यम से ही पता चला । मिश्रा, उनकी पत्नी और बेटी महाकुंभ मेले में गए हुए हैं, जबकि हीरा मिश्रा धार्मिक कार्यों के लिए पटना गए हुए हैं । अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विरेंद्र भट ने याचिका को अनुमति देते हुए कहा, ‘‘ तथ्यों और परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए चारों आरोपियों को आज के लिए छूट दी जाती है । आरोपियों को 18 फरवरी की अगली तारीख पर पेश होना चाहिए । ’’ अदालत ने चार फरवरी को उन्हें पेश होने को कहा था । मामले में चारों आरोपियों पर पीड़िता को अवैध तौर पर कैद में रखने का आरोप है । पीड़िता और उसके पिता ने आरोप लगाया कि मिश्रा के पश्चिम दिल्ली
स्थित महावीर एनक्लेव के कार्यालय और उनके भाई के आवास में उसे अपहरण के बाद कुछ दिन तक कैद रखा गया और उनके परिवार के सदस्यों ने उसे बलात्कार के आरोपी और मुख्य अभियुक्त प्रदीप सेहरावत से शादी कर लेने को कहा । मामला 2006 नवंबर की एक घटना से जुड़ा है जब सेहरावत ने 16 साल की पीड़ित का उस वक्त अपहरण कर लिया जब वह पश्चिम दिल्ली में ट्यूशन पढने जा रही थी । अदालती प्रक्रिया के दौरान दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने अदालत को सूचित किया कि जारी किए सम्मन मिश्रा और उनके पिरवार को नहीं मिले क्योंकि मिश्रा के आवास पर जब वे सम्मन लेकर पहुंचे तो उनके सुरक्षा गार्ड ने बताया कि कांग्रेस सांसद और उनके परिवार के सदस्य दिल्ली से बाहर गए हुए हैं । इन चार आरोपियों के अलावा पुलिस ने मामले में प्रदीप सेहरावत, देवेंद्र , सुनील , सुरेंद्र और सतिंदर के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया है । ये पांचों आरोपी जमानत पर बाहर हैं और आज अदालत में मौजूद थे । मिश्रा और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पुलिस द्वारा बाद में सौंपे गए पूरक आरोप पत्र के पत्रभाग दो में संदिग्ध के तौर पर दर्ज हैं जिनके खिलाफ सबूत नहीं है । 2008 में मजिस्ट्रेट की एक अदालत ने और 2010 में एक सत्र अदालत ने सबूत नहीं होने और कानूनी प्रावधानों के आधार पर मामले में मिश्रा के खिलाफ सम्मन जारी करने से इंकार कर दिया था । दिल्ली उच्च न्यायालय ने हालांकि 2012 में सुनवाई अदालत के आदेश को दरकिनार करते हुए मामले पर फिर से विचार करने का आदेश दिया था ।(भाषा)
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Last Updated on Friday, 08 February 2013 12:25 |