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बेटे के खिलाफ सबूत नष्ट करने वाली मां को मिली जेल PDF Print E-mail
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Friday, 08 February 2013 10:22

नई दिल्ली, जनसत्ता। वह इस बात से वाकिफ थी कि उसके बेटे ने बच्ची से बलात्कार किया और उसकी हत्या की। दिल्ली की एक अदालत ने तीन साल की बच्ची से बलात्कार, अप्राकृतिक यौनाचार और उसकी हत्या के आरोपी किशोर की मां को अपने बेटे के खिलाफ सबूत को नष्ट करने के जुर्म में पांच साल के कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजीव बंसल ने 50 साल की सुनीता को यह कहते हुए सजा सुनाई कि वह इस बात से वाकिफ थी कि उसके बेटे ने बच्ची से बलात्कार किया और उसकी हत्या की और उसने सबूतों को नष्ट करने का प्रयास किया ताकि उसे अदालत की सजा से बचाया जा सके।
अदालत ने महिला पर पांच हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार 13 साल के किशोर ने 21 जुलाई 2007 को बच्ची से बलात्कार और अप्राकृतिक यौनाचार किया और उसके बाद लड़की के मुंह में कपड़ा ठूंसकर उसकी हत्या कर दी। जब सुनीता को पता चला कि उसके बेटे ने यह अपराध किया है तो उसने अपने बेटे को सजा से बचाने के लिए उसके कपड़े से खून के धब्बे हटाए और उसे एक पार्क में झाड़ियों में छिपा दिया ताकि सबूत मिटाए जा सके।
नामधारी और अन्य की न्यायिक हिरासत 15 फरवरी तक बढ़ाई गई : उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के बर्खास्त प्रमुख एसएस नामधारी और नौ अन्य लोगों की न्यायिक हिरासत दिल्ली की एक अदालत ने 15 फरवरी तक बढ़ा दी। इन लोगों को शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा और उसके भाई की हत्या में कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया था। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट मुकेश कुमार ने नामधारी, उनके निजी सुरक्षा अधिकारी सचिन त्यागी और आठ अन्य की न्यायिक हिरासत आठ दिन के लिए बढ़ा दी। इन लोगों को न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद अदालत के समक्ष पेश किया गया था जिसके बाद उनका रिमांड बढ़ाया गया।
अदालत ने पोंटी के सहायक आरोपियों भूपेंदर सिंह, उदय राज सिंह, राजपाल सिंह, आनंद सिंह बिष्ट, मथुरा सिंह मेहरा और सतनाम सिंह पोंटी की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी। उसने नामधारी के लोगों सिमरनजीत सिंह और जगबीर सिंह की भी न्यायिक हिरासत बढ़ा दी। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने नामधारी पर पोंटी चड्ढा के छोटे भाई हरदीप की हत्या का मामला दर्ज किया है। नामधारी के


निजी सुरक्षा अधिकारी त्यागी को भी अपराध में उसकी कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया था। पोंटी और हरदीप के बीच संपत्ति को लेकर विवाद था। ये दोनों पिछले साल 17 नवंबर को छतरपुर स्थित फार्महाउस में दोनों तरफ से हुई गोलीबारी में मारे गए थे। इसके बाद त्यागी और नामधारी समेत 10 लोगों को घटना से जुड़े विभिन्न आपराधिक मामलों में गिरफ्तार किया गया था।
पूर्व पत्नी के गुजारे के लिए एनआरआई पति को देने होंगे 11.6 लाख : शादी के कुछ ही दिन के भीतर पत्नी से अलग होने के 13 साल बाद एक एनआरआई पति को अदालत ने निर्देश दिया है कि वह अलगाव के 44 महीनों तक अकेली रही पत्नी के गुजारे पर आए खर्च के तौर पर 11.6 लाख रुपए का भुगतान करे। पति से अलग होने के 44 महीने बाद महिला ने दूसरी शादी कर ली थी। दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एमएल मेहता ने कहा कि यह न्यायपूर्ण और तार्किक होगा कि वादी (महिला) को गुजारे के खर्च के तौर पर हर महीने 500 अमेरिकी डॉलर (26,500 रुपए) के हिसाब से 12 फीसद ब्याज सहित भुगतान किया जाए। गुजारे पर खर्च हुई राशि पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने वाली महिला ने 1200 अमेरिकी डॉलर हर महीने की मांग की थी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 27 जुलाई 2001 को अंतरिम गुजारा खर्च के तौर पर 400 अमेरिकी डॉलर की मंजूरी दी थी लेकिन पेशे से सॉफ्टवेयर डेवलपर महिला का पूर्व पति आदेश का पालन करने में नाकाम रहा। महिला के वकील ने अदालत में कहा कि टाटा एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट (टीईआरआई) में काम करने वाली उसकी मुवक्किल को 23 अप्रैल 1999 में हुई शादी की वजह से अमेरिका के डेलवेयर जाना पड़ा। वकील ने कहा कि शादी के दो दिन बाद कहा गया कि यदि वह अपने पति के साथ अमेरिका में रहना चाहती है तो उसे 10 लाख रुपए नकद और कुछ उपहार लाने होंगे। महिला की याचिका के मुताबिक जब वह अपने पति की मांगें पूरी करने में नाकाम रही तो आखिरकार उसे 11 मई 1999 को अमेरिका से विदा होना पड़ा। याचिका के मुताबिक महिला का पूर्व पति डेलवेयर के विलमिंगटन की एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी में काम करता है और वह हर महीने 5000 डॉलर कमाता है। इसके अलावा उसे कई और भत्ते और सुविधाएं मिलती हैं।

 

Last Updated on Friday, 08 February 2013 10:43
 
 

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