मुखपृष्ठ
Bookmark and Share
गुजरात दंगों की जवाबदेही तय होना जरूरी: यूरोपीय संघ PDF Print E-mail
User Rating: / 0
PoorBest 
Thursday, 07 February 2013 17:52

नयी दिल्ली । प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने की उठ रही मांग के बीच यूरोपीय संघ ने आज कहा कि 2002 के गुजरात दंगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने की उठ रही मांग के बीच गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्रद मोदी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जनता के सभी वर्गो से संपर्क बढ़ाने की मुहिम में जुटे हैं, लेकिन यूरोपीय संघ ने आज कहा कि 2002 के गुजरात दंगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
यूरोपीय यूनियन :ईयू: ने कहा कि गुजरात दंगों की जवाबदेही तय होना भारत और विश्व के सभी लोगों के हित मे है।
उसने कहा कि गुजरात विधानसभा चुनाव में विजय के बाद पिछले महीने मोदी से मिलने वाले यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल ने 2002 के दंगों का मामला उठाया था।
भारत में ईयू के राजदूत जोआओ क्राविन्हो ने कहा, ‘‘2002 के दंगों में क्या हुआ, इस पर चर्चा करने के लिए मोदी हमारे निमंत्रण पर जनवरी में हमारी भोज बैठक में आए थे। चर्चा करने वाले विषयों में 2002 के दंगो के संदर्भ में न्यायिक प्रक्रिया, जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठे। गुजरात में विकास और हाल की चुनावी विजय के बारे में भी चर्चा हुई।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या दंगों के बाद 10 साल तक मोदी का


बहिष्कार करने वाला ईयू उनके प्रति नरम पड़ रहा है, उन्होंने कहा, ‘‘मैं समझता हूं कि 2002 में जो हुआ उसकी जवाबदेही भारत और दुनिया भर के लोगों के हित में है।’’
क्राविन्हो ने कहा कि 2002 के दंगों को लेकर भारत में कुछ हद तक भावनाएं और संवेदनाएं जुड़ी हुई हैं।
इस संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘‘मैं समझता हूं कि कल मुख्यमंत्री ने अपना भाषण दिया :दिल्ली के एसआरसीसी कालेज में: जो काफी उत्सुकता का मामला था। लेकिन इसके साथ ही कुछ अन्य लोग थे जो काफी नाखुश थे... मुझे लगता है कि इस मामले में निश्चित तौर पर काफी भावनाएं और संवेदनाएं हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘और यह ऐसा मामला है जिसे हम बड़ी उत्सुकता से देखेंगे।’’
गुजरात दंगों के दौरान नरोदा पटिया नरसंहार मामले में गुजरात की एक अदालत द्वारा विधायक माया कोदनानी और बजरंग दल नेता बाबू बजरंगी के साथ 30 अन्य को सजÞा सुनाए जाने के बारे में सवाल किए जाने पर उन्होंने कहा, भारतीय न्याय धीमा हो सकता है लेकिन वे मामलों का निपटारा करते हैं।
इससे पहले पिछले साल अक्तूबर में ईयू के महत्वपूर्ण सदस्य देश ब्रिटेन ने गुजरात के एक दशक के अपने बहिष्कार को समाप्त किया और भारत में उसके उच्चायुक्त जेम्स बेवल मोदी से मिले। इस ‘‘मैत्रीपूर्ण’’ शुरूआत से दोनों पक्षों ने व्यापक आर्थिक सहयोग पर चर्चा की। (भाषा)

Last Updated on Thursday, 07 February 2013 17:57
 
 

आप की राय

क्या आपको लगता है कि स्पॉट फिक्सिंग मामले में दोषी खिलाड़ियों पर आजीवन प्रतिबंध लगा देना चाहिए?