|
Tuesday, 05 February 2013 12:36 |
जनसत्ता ब्यूरो नई दिल्ली । तेलंगाना मुद्दे पर जल्द किसी फैसले को लेकर पड़ रहे दबाव के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी से सलाह मशविरा किया।
रेड्डी ने सोनिया के निवास 10 जनपथ पर उनसे और उनके राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल से आधे घंटे तक मुलाकात की। उन्होने पार्टी नेतृत्व को अलग राज्य के मुद्दे पर राज्य की स्थिति के बारे में जानकारी दी। इससे पहले रेड्डी ने आंध्र प्रदेश के प्रभारी और कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद के साथ अलग से एक घंटे तक बातचीत की। उन्होंने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी मुलाकात की। आजाद ने पहले यह संकेत दिए थे कि केंद्रीय नेतृत्व आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री, राज्य कांग्रेस समिति के अध्यक्ष और राज्य के तीन क्षेत्रों के वरिष्ठ नेताओं के साथ परामर्श प्रक्रिया के तहत तेलंगाना मुद्दे पर चर्चा करेगा। सूत्रों के मुताबिक राज्य कांग्रेस अध्यक्ष बी सत्यनारायण भी सलाह मशविरे के लिए दिल्ली आएंगे। तेलंगाना संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) ने तेलंगाना मुद्दे पर और बातचीत करने के केंद्र के कदम की अनदेखी कर 16 फरवरी से 21 फरवरी तक तेलंगाना क्षेत्र के विधायकों पर दबाव बनाने के लिए अभियान चलाने का भी फैसला किया। जेएसी ने रविवार को अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने के लिए इस महीने और मार्च के शुरू में राजमार्गों को जाम करने और ‘चलो असेंबली’ आयोजित करने का भी एलान किया है। कांग्रेस नेतृत्व और यूपीए सरकार पर तेलंगाना के मुद्दे पर फैसले करने का लगातार दबाव बना हुआ है। तेलंगाना क्षेत्र से पार्टी के सात सांसदों
के एक समूह ने 30 जनवरी को कूरियर के माध्यम से अपने इस्तीफे सोनिया को भेजे थे। उनकी तरफ से यह चेतावनी भी आई कि यदि कांग्रेस हाईकमान ने इस मुद्दे पर जल्द फैसला नहीं किया तो वें अपना इस्तीफा लोकसभा अध्यक्ष को भी दे देंगे। हालांकि इन सांसदों में से एक निजामाबाद के सांसद मधु गौड़ा के इस बयान से मतभेद उभर गए कि पार्टी प्रवक्ता पी सी चाको के बयान के बाद वे इस्तीफे की जरूरत नहीं समझते। चाको ने कहा था कि कांग्रेस तेलंगाना के गठन के खिलाफ नहीं है। लेकिन उन्होंने कहा कि वे इस्तीफे के मुद्दे पर तब तक के लिए अडिग रहेंगे जब तक तेलंगाना के गठन के लिए जल्द कोई रूपरेखा निरूपित नहीं की जाती। इसके बाद यूपीए के घटक दल राकांपा की तरफ से भी यह मुद्दा उठाया गया और इस पर जल्द फैसले की मांग की गई। राकांपा प्रमुख शरद पवार ने 31 जनवरी को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मलाकात की और उनसे कहा है कि इस मामले में विलंब करने से मदद नहीं मिलेगी। तेलंगाना पर जल्द फैसले के समर्थन में खुल कर आने वाला राकांपा यूपीए का पहला घटक है। पवार ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री के समक्ष इस मुद्दे को उठाया और उम्मीद करते हैं कि जल्द यूपीए की बैठक होगी। पवार ने इस बात पर भी जोर दिया कि कांगे्रस आमतौर पर तेलंगाना समर्थक है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी का मानना है कि तेलंगाना के गठन को लंबे समय तक नहीं टाला जा सकता। हालांकि इसके बारे में कोई अधिकृत पुष्टि नहीं की गई है।
|