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रेप पीड़िता की मौत होने पर हो सकती है सजा ए मौत PDF Print E-mail
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Monday, 04 February 2013 16:11

नयी दिल्ली। बलात्कार पीड़िता के जख्मी होने और फिर मौत होने या कोमा जैसी स्थिति में पहुंचने के मामलों में बलात्कारी को सजा ए मौत सुनायी जा सकती है।

बलात्कार निरोधक कानूनों को अधिक कठोर बनाने के लिए लाये गये अध्यादेश में यह प्रावधान किया गया है।
आपराधिक कानून : संशोधन : अध्यादेश 2013 में अलगाव के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी के साथ की गयी यौन हिंसा के लिए भी दंड बढाया गया है और अब इस अपराध के लिए सात साल तक की कैद हो सकती है । राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कल ही इस अध्यादेश को मंजूरी दी है।
अध्यादेश की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री पी चिदंबरम और सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने यहां संवाददाताओं को बताया कि धारा-376 : बलात्कार : की उपधारा-1 या उपधारा-2 के तहत दंडनीय अपराध करने वाले व्यक्ति, जिसके अपराध के फलस्वरूप कोई जख्मी होता है और बाद में उसकी मौत हो जाती है या फिर वह कोमा जैसी स्थिति में पहुंचता है तो उसे कडे कारावास की सजा होगी।


यह सजा 20 साल से कम नहीं होगी लेकिन इसे आजीवन कारावास तक बढाया जा सकता है यानी उसके स्वभाविक जीवन के शेष बचे हिस्से के दौरान उसे कारावास में ही रहना होगा या फिर उसे सजा ए मौत हो सकती है ।
ऐसे मामलों में जहां किसी व्यक्ति के साथ एक या अधिक लोग यौन हिंसा करते हैं तो हर अपराधी को कम से कम 20 साल के कडे कारावास की सजा हो सकती है । इसे बढाकर आजीवन कारावास भी किया जा सकता है यानी उसके शेष बचे जीवन के हिस्से के दौरान उसे जेल में रहना होगा और पीडिता को मुआवजा भी देना होगा ।
अध्यादेश के मुताबिक तेजाब फेंकने से यदि किसी को स्थायी या अस्थायी नुकसान पहुंचता है या वह गंभीर रूप से जख्मी होता है तो ऐसे अपराध के लिये अपराधी को कम से कम दस साल और अधिकतम उम्र कैद की सजा हो सकती है। इसके अलावा इस अपराध के लिये उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जो अधिकतम दस लाख रूपये हो सकता है। (भाषा)

 

 

Last Updated on Monday, 04 February 2013 19:03
 
 

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