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Monday, 04 February 2013 13:45 |
नयी दिल्ली। ऐसी अफवाहें हैं कि उन्होंने विधि मंत्रालय के साथ अपने मतभेदों के चलते यह फैसला किया है।
भारत के सोलिसिटर जनरल पद पर 18 महीने अपनी सेवाएं देने के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता रोहिंटन नरीमन ने पद से इस्तीफा दे दिया है। वर्षीय नरीमन को 23 जुलाई 2011 को देश के दूसरे सबसे वरिष्ठ विधि अधिकारी के रूप में सोलिसिटर जनरल पद पर नियुक्त किया गया था। सूत्रों ने बताया कि नरीमन ने अपने त्यागपत्र में इस्तीफा देने के लिए कोई कारण नहीं बताया है । ऐसी अटकलें थीं कि नरीमन विधि मंत्री अश्विनी कुमार तथा मंत्रालय के कुछ निर्देशों को लेकर नाखुश थे । 14 जुलाई 2011 को तत्कालीन सोलिसिटर जनरल एस जी गोपाल सुब्रमण्यम के इस्तीफा देने के बाद नरीमन को इस पद पर नियुक्त किया गया था। सुब्रमण्यम ने 2 जी संबंधी मामले में उच्चतम न्यायालय में सरकार के प्रतिनिधि के रूप में बतौर विशेष अधिवक्ता नरीमन
की नियुक्ति किए जाने के चलते इस्तीफा दिया था। नरीमन प्रख्यात न्यायविद फली एस नरीमन के पुत्र हैं । वह मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडिया लिमिटेड के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे के साथ मिलकर जिरह कर चुके हैं । यह मामला अंबानी बंधुओं के बीच केजी बेसिन से गैस की आपूर्ति तथा कीमत निर्धारण को लेकर पैदा हुए विवाद से संबंधित था। नरीमन को 1993 में 37 साल की उम्र में वरिष्ठ अधिवक्ता बनाया गया था । उस समय भारत के प्रधान न्यायाधीश एम एन वेंकटचलैय्या ने नियमों में संशोधन करते हुए किसी वकील को वरिष्ठ अधिवक्ता बनाए जाने के लिए 45 साल की आयु सीमा को कम कर दिया था। रोहिंटन दिल्ली विश्वविद्यालय के कैम्पस लॉ सेंटर से एलएलबी करने के बाद 1974 में बार से जुड़े । लॉ सेंटर में वह शीर्ष स्थान हासिल करने वाले छात्रों में शामिल थे। वह आगे की पढ़ाई करने के लिए हार्वर्ड भी गए थे। (भाषा)
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