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Monday, 04 February 2013 10:15 |
राजीव जैन, जयपुर। भाजपा आलाकमान ने राजस्थान में फिर से सरकार बनाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर भरोसा जताते हुए उन्हें प्रदेश में पार्टी कमान सौंप दी है।
वसुंधरा राजे को कमान मिलते ही पार्टी अब नए जोश के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी। इस फैसले के बाद कलह से जूझ रही प्रदेश भाजपा में उत्साह पनप गया है। राज्य में करीब चार साल से कलह से जूझ रही भाजपा को चुनावी साल में जनाधार वाला नेतृत्व मिल गया है। भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद संभालने के बाद राजनाथ सिंह ने राजस्थान का मसला हल कर दिया। प्रदेश में गुटों में बंटी पार्टी में बेहतर तालमेल के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व ने वसुंधरा विरोधी खेमे के संघनिष्ठ वरिष्ठ विधायक गुलाब चंद कटारिया को विधानसभा में विपक्ष का नेता पद सौंप दोनों खेमों को एकजुट हो चुनावी मैदान में उतरने के संकेत दिए हैं। वसुंधरा राजे के प्रदेश भाजपा की कमान संभालने से पहले ही सत्ताधारी कांग्रेस में खलबली मच गई है। वसुंधरा राजे आक्रामक शैली की नेता हैं और उनके प्रति प्रदेश की महिलाओं के साथ ही युवा वर्ग में खासा आकर्षण है। भाजपा में हुए बदलाव का असर प्रदेश कांग्रेस में भी पड़ना तय है। वसुंधरा राजे की प्रदेश अध्यक्ष पद पर तैनाती के साथ ही भाजपा में खासा उत्साह पनप गया है। उनकी घोषणा होते ही प्रदेश भर में भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश भर गया। वसुंधरा राजे को प्रदेश में कमान सौंपने का फैसला पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी के कार्यकाल में ही हो गया था। इस मामले में वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने बड़ी भूमिका निभाई। संघ से जुड़े प्रदेश भाजपा के नेताओं को वसुंधरा राजे को लेकर कोई एतराज नहीं था। वसुंधरा विरोधी नेताओं को एतराज सिर्फ वसुंधरा राजे के कुछ समर्थकों की कार्यशैली को लेकर था। संघ से जुड़े नेताओं का कहना था कि बाहरी दलों से भाजपा में आए कुछ नेताओं ने ही माहौल बिगाड़ दिया था। भाजपा आलाकमान ने वसुंधरा राजे को कमान सौंपते हुए मूल भाजपाइयों की अनदेखी नहीं होने के निर्देश दिए हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में भाजपा के लिए अच्छा माहौल है। प्रदेश
में कांग्रेस सरकार के खिलाफ माहौल का फायदा जनाधार वाला नेता ही उठा सकता है। इस हालत में भाजपा के लिए वसुंधरा राजे के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसे विरोधी धड़े के नेता भी मानते हैं। वसुंधरा राजे के प्रदेश अध्यक्ष बनने के साथ ही राज्य के सियासी समीकरणों में बदलाव आएगा। प्रदेश भाजपा संगठन में अब तक संघनिष्ठ खेमे का दबदबा बना हुआ था। यह अब टूट जाएगा। प्रदेश संगठन में होने वाले बदलावों का असर निचले स्तर तक जाएगा। भाजपा सूत्रों का कहना है कि वसुंधरा राजे को कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा। उन्हें पार्टी को खेमेबंदी से उबारना होगा। प्रदेश संगठन की संतुलित टीम बनाना बड़ी जिम्मेदारी होगी। पार्टी को चुनावी मैदान में ले जाने के लिए कांग्रेस सरकार के प्रति आक्रामक रवैया अपनाना होगा। विधानसभा चुनाव में साफ-सुथरे और वफादार चेहरों को टिकट दिलाना जरूरी होगा। वसुंधरा राजे दूसरी बार प्रदेश भाजपा की अध्यक्ष बनी हैं। उन्हें जब पहली बार यह जिम्मेदारी मिली थी उस समय पार्टी की हालत पतली थी और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बहुमत से शासन कर रही थी। इसके बावजूद वसुंधरा राजे ने करिश्मा करते हुए प्रदेश में भाजपा को एक सौ बीस से ज्यादा सीटें दिलाकर सरकार बनाने में कामयाबी हासिल कर ली थी। उनके समर्थकों का दावा है कि इस बार तो वसुंधरा राजे की अगुआई में भाजपा प्रदेश में कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर देगी। भाजपा सूत्रों का कहना है कि वसुंधरा राजे सात फरवरी को जयपुर में अध्यक्ष पद संभालेंगी। वसुंधरा राजे दिल्ली से सड़क मार्ग से जयपुर आएंगी। इस दौरान भाजपा अपनी ताकत का प्रदर्शन भी करेगी। वसुंधरा राजे के आगमन के मार्ग पर जोरदार स्वागत की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। प्रदेश भर में वसुंधरा समर्थकों ने जश्न मना कर खुशियां मनाई है। दूसरी तरफ विपक्ष का नेता मनोनीत होने के बाद रविवार को उदयपुर पहुंचने पर गुलाब चंद कटारिया का भी जोरदार स्वागत किया गया। कटारिया का कहना है कि वसुंधरा राजे के साथ पूरा तालमेल रख प्रदेश में भाजपा की फिर से सरकार बनाई जाएगी। इसके लिए पूरे प्रदेश में पार्टी को एकजुट किया जाएगा।
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