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विश्वरूपम के प्रदर्शन पर त्रिपक्षीय वार्ता विफल PDF Print E-mail
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Saturday, 02 February 2013 12:26

चेन्नई । तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के मुसलिम समूहों और अभिनेता कमल हासन के बीच मध्यस्थता की पेशकश के बाद हासन की फिल्म ‘विश्वरूपम’ के प्रदर्शन को लेकर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए प्रस्तावित त्रिपक्षीय बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। खबरों के मुताबिक मुसलिम संगठनों के बातचीत के दौरान अभिनेता की मौजूदगी पर जोर देने की वजह ऐसा हुआ। इस बीच मद्रास हाई कोर्ट में शुक्रवार को दायर एक जनहित याचिका में अधिकारियों को कमल हासन की विवादित फिल्म ‘विश्वरूप’ को संपादित किए  बगैर उसके वर्तमान स्वरूप में देश भर में प्रदर्शन पर रोक लगाने का निर्देश देने की मांग की गई।
बैठक में फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल मुसलिम समूहों के प्रतिनिधि, कमल हासन के भाई चंद्र हासन और राज्य के गृह सचिव ने शुरू  में अनौपचारिक रूप से चर्चा की ताकि बातचीत का आधार तैयार किया जा सके। लेकिन शाम तक बैठक के बारे में कोई संकेत नहीं मिला और न ही आधिकारिक रूप से कुछ कहा गया।
इससे पहले, फेडरेशन आॅफ मुसलिम ओर्गेनाइजेशन के समन्वयक मोहम्मद हनीफा ने कहा कि उन्होंने मैत्रीपूर्ण बातचीत की इच्छा जाहिर करते हुए सरकार को एक पत्र सौंपा था। उन्होंने साथ ही कहा कि यह बैठक शुक्रवार शाम आयोजित होगी। उन्होंने कहा कि हम इस मुद्दे को सुलझाना चाहते हैं और हमें विश्वास है कि हमारी मांगे पूरी होगी और फिल्म प्रदर्शित होंगी।  हनीफा ने उन खबरों के बारे में कुछ नहीं कहा


कि उन्होंने बैठक के दौरान कमल हासन के मौजूद होने की मांग की थी।
फिल्म पर रोक लगाने के सरकार के फैसले पर चुप्पी तोड़ते हुए जयललिता ने बातचीत के लिए हासन और मुसलिम समूहों के आगे आने पर गुरुवार को मामले के मैत्रीपूर्ण समाधान के लिए मध्यस्थता कराने की पेशकश की थी। फिल्म जगत के लोगों ने जयललिता की इस पेशकश का स्वागत किया था। तमिल, तेलुगू और हिंदी में बनी ‘विश्वरूपम’ राज्य में 25 जनवरी को प्रदर्शित होने वाली थी। हासन ने तुरंत सुप्रीम कोर्ट में जाने की बात से इनकार करते हुए कहा था कि वे मद्रास हाई कोर्ट के अगले हफ्ते आने वाले फैसले का इंतजार करेंगे और इस दौरान बातचीत द्वारा समाधान ढूंढ़ने की कोशिश करेंगे।
उधर शुक्रवार को मद्रास हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई जिसमें कहा गया कि जब तक फिल्म में संशोधन नहीं किया जाता तब तक भारत में इसके प्रदर्शन पर रोक लगाने का निर्देश दिया जाए। अधिवक्ता सी जेवकुमार जार्ज ने अपनी जनहित याचिका में कहा कि उन्होंने तिरुवनंतपुरम में फिल्म को देखा और कई दृश्यों को आपत्तिजनक पाया। उन्होंने कमल को स्वघोषित नास्तिक बताया जिसे किसी भी तरह धार्मिक भावनाओं को ‘बदनाम’ करने का कोई अधिकारी नहीं है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि वह अधिकारियों को यह निर्देश दिया कि फिल्म को सिनमेटोग्राफी कानून के 12वें और 13वें दिशानिर्देशों के अनुसार संपादित किए बगैर इसके प्रदर्शन पर रोक लगाई जाए।

 
 

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