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मुशर्रफ साहसी थे इसलिए घुसे करगिल सीमा में: वीके सिंह PDF Print E-mail
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Saturday, 02 February 2013 11:20

नई दिल्ली । पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने जनरल परवेज मुशर्रफ की तारीफ की।

पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने 1999 में भारतीय सीमा क्षेत्र के करगिल में काफी अंदर तक घुस आने के कारण शुक्रवार को पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक जनरल परवेज मुशर्रफ की तारीफ करते हुए कहा कि यह एक सैन्य कमांडर के ‘साहस’ को दिखाता है। 2010 से 2012 तक भारतीय थल सेना के प्रमुख रहे सिंह ने कहा कि भारत की तरफ से कुछ गलतियां हुर्इं जिससे पाक सेना को भारतीय सीमा में दाखिल होने और मुशर्रफ को सुरक्षित वापस जाने में मदद मिली। सिंह ने पत्रकारों से कहा-जहां तक जनरल मुशर्रफ की बात है, मैं इसे दो तरह से देखता हूं। पहला, सैन्य कमांडर के तौर पर, भारतीय सीमा के 11 किलोमीटर भीतर तक आकर अपने सैनिकों के साथ एक रात बिताने के लिए मैं जनरल मुशर्रफ की तारीफ करूंगा। यह एक सैन्य कमांडर का साहस कहा जाएगा कि वे जानते हुए भी इतनी दूर तक आ गया कि वहां खतरा है।
उन्होंने कहा-दूसरा, हमारी तरफ क्या हो रहा था आप सभी जानते हैं। सारे तथ्य आपके सामने हैं। हमने उन्हें जाने क्यों दिया? हमने उन्हें दाखिल क्यों होने दिया? मैं इतना ही कहूंगा कि कुछ गलतियां हुर्इं जिसे दुरुस्त करने की जरूरत है। जनरल सिंह पाकिस्तानी सेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी के उस खुलासे के बाबत अपना बयान दे


रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि 1999 में करगिल में युद्ध शुरू  होने से तीन महीने पहले मुशर्रफ ने एक रात अपने सैनिकों के साथ बिताई थी।
पूर्व थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि यह खुलासा इस बात की तस्दीक करता है कि पाकिस्तान ने ही करगिल की जंग शुरू  की थी। उन्होंने कहा-हम सभी जानते हैं कि पाकिस्तानी सेना ने ही करगिल जंग की शुरुआत की थी। इसमें कुछ भी नया नहीं है। सिंह ने कहा कि पाकिस्तान झूठ बोलता रहा है और अब तो उसके अधिकारी भी हमारे रुख की पुष्टि कर रहे हैं। मुशर्रफ ने एक हेलिकॉप्टर में नियंत्रण रेखा पार की थी और भारतीय सीमा के 11 किलोमीटर अंदर तक आकर एक रात अपने सैनिकों के साथ बिताई थी। पाकिस्तान की थलसेना की मीडिया शाखा में आला अधिकारी रहे कर्नल (सेवानिवृत्त) अशफाक हुसैन ने हाल ही में कहा है कि मुशर्रफ ने 28 मार्च 1999 को नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय सीमा में 11 किलोमीटर तक का सफर किया।
हुसैन के मुताबिक मुशर्रफ के साथ 80 ब्रिगेड के तत्कालीन कमांडर ब्रिगेडियर मसूद आलम भी थे। उन्होंने जिकरिया मुश्तकार नाम की जगह पर रात गुजारी। इस जगह पर कर्नल अमजद शब्बीर की अगुआई में पाकिस्तानी सेना मौजूद थी। जनरल सिंह ने कहा-जंग सिर्फ सेना नहीं लड़ती। इसे सियासी जमात का समर्थन भी होना चाहिए। जब उन्हें राजनीतिक समर्थन नहीं मिला तो उन्हें वापस जाना ही था। (भाषा)

 
 

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