मुखपृष्ठ
Bookmark and Share
आशीष नंदी की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक PDF Print E-mail
User Rating: / 0
PoorBest 
Friday, 01 February 2013 12:45

नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने नंदी को सलाह दी है कि उन्हें उस तरह की टिप्पणियों से बचना चाहिए जैसी कि उन्होंने जयपुर साहित्य महोत्सव के दौरान की थी। पीठ ने नंदी की गिरफ्तारी पर रोक तो लगाई लेकिन साथ ही कहा कि वह इस तरह के बयान देना जारी नहीं रख सकते। आपका इरादा कुछ भी हो लेकिन आप इस तरह के बयान नहीं दे सकते।

 

 

पीठ ने 76 वर्षीय नंदी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी से कहा, ‘‘अपने मुवक्किल से कहिए कि उनके पास इस तरह के बयान देने का कोई लाइसेंस नहीं है।’’   
शीर्ष अदालत ने नंदी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को खारिज करने की मांग वाली उनकी याचिका पर केन्द्र और राजस्थान सरकार को नोटिस जारी करके उनका जवाब मांगा।
प्रधान न्यायाधीश अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 26 जनवरी को जेएलएफ में उनके द्वारा दिये गये बयान के संबंध में दर्ज प्राथमिकी के तहत याचिकाकर्ता :नंदी: की इस बीच गिरफ्तारी नहीं होगी।
पीठ ने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और बिहार की सरकारों को भी नोटिस जारी करके चार हफ्तों में उनका जवाब मांगा क्योंकि बयानों के संबंध में नंदी के खिलाफ रायपुर, नासिक और पटना में भी प्राथमिकी दर्ज हुई हैं।
इस पीठ में न्यायमूर्ति एआर दवे और न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन भी शामिल थे। पीठ ने नंदी से कहा कि बयान जिम्मेदार तरीके से दिये जाते हैं।
जब लेखी ने पीठ से यह कहने का प्रयास किया कि किसी व्यक्ति को उसके विचार जाहिर करने के लिए सजा नहीं दी जा सकती तो अदालत ने कहा, ‘‘आप कुछ भी ऐसा क्यों कहते हैं जो :कहना :आपका इरादा नहीं है।’’

कार्यवाही के दौरान, लेखी ने कहा कि एक अपराध के लिए अलग अलग जगहों पर कई प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकतीं, जिस पर पीठ ने कहा कि इससे हर जगह के लोग प्रभावित होते


हैं। इस तरह की बातें मत कीजिए।
जब लेखी ने कहा कि उन्माद पैदा किया गया है, इस पर पीठ ने कहा, ‘‘:उन्माद: कौन पैदा कर रहा है। बयान किसने दिये। कृपया वह कहिए जो आपके मुवक्किल ने आपसे कहने को कहा है।’’
गौरतलब है कि जयपुर साहित्य महोत्सव में एक परिचर्चा के दौरान नंदी ने कथित रूप से कहा था कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछडा वर्ग :ओबीसी: के लोग ज्यादा भ्रष्ट होते हैं।
नंदी के खिलाफ अनुसूचित जाति, जनजाति :अत्याचार रोकथाम: अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अधिवक्ता ने कहा कि नंदी अपने कथित बयानों के लिए माफी मांग चुके हैं।
नंदी के वकील ने अपनी दलीलें यह कहते हुए शुरू कीं कि क्या कानून किसी विचार को सजा दे सकता है।
हालांकि पीठ ने कहा कि हम बिल्कुल भी खुश नहीं हैं।
नंदी ने प्राथमिकी खारिज करने की मांग को लेकर कल शीर्ष अदालत से गुहार लगाई थी।
कार्यवाही को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा था कि वह अपने खिलाफ उत्तेजित माहौल में गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं।
याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता का अनुसूचित जाति या जनजाति के किसी सदस्य को अपमानित करने को कोई इरादा नहीं था और याचिकाकर्ता के खिलाफ अजा,अजजा कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज होना मौलिक अधिकार के उन मूल सिद्धांतों के खिलाफ है जिसमें यह बात निहित है कि अभिव्यक्ति की आजादी लोकतांत्रिक समाज का स्तंभ होती है।
अदालत के बाहर नंदी ने संवाददाताओें से कहा कि मुझे सचेत रहना होगा। यह मामला विचाराधीन है। मैं राहत के लिए उच्चतम न्यायालय और मेरा बचाव करने में बहुत अच्छी तरीके से बात रखने के लिए बचाव दल का आभारी हूं।
उन्होंने कहा, ‘‘एक या दो दुर्लभ अपवादों को छोड़कर, मैं इतना समर्थन देने के लिए मीडिया का भी आभारी हूं। भारत की जनता भी मेरे साथ खड़ी हुई है।’’(भाषा)

 

 

Last Updated on Friday, 01 February 2013 14:33
 
 

आप की राय

क्या 2014 लोकसभा चुनाव मे भाजपा की सत्ता मे वापसी हो पाएगी?