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Friday, 01 February 2013 10:26 |
नयी दिल्ली। कमल हासन की फिल्म ‘विश्वरूपम’ को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने आज सिनेमेटोग्राफी अधिनियम की समीक्षा करने का फैसला लिया ताकि सेंसर बोर्ड के फैसलों का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर एक पोस्ट में लिखा, ‘‘सेंसर बोर्ड के फैसलों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की जरूरत है नहीं तो हर राज्य खुद ही सेंसर :बोर्ड: बन जाएगा।’’ उन्होनें संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने सूचना एवं प्रसारण सचिव से इस अधिनियम की समीक्षा करने वाली एक समिति गठित करने के लिये कहा है। तिवारी ने बताया कि यह समिति कानून की समीक्षा करेगी और इस अधिनियम को मजबूत बनाने की जरूरत है। संविधान के सातवीं अनुसूची के तहत केंद्र सरकार के पास किसी फिल्म को प्रदर्शन के योग्य या अयोग्य ठहराने का अधिकार
है। तिवारी ने कहा कि राज्य फिल्मों के प्रदर्शन को लेकर सेंसर बोर्ड के फैसले लागू करें। हालांकि अदालत में मामला होने की वजह से उन्होंने ‘विश्वरूपम’ को लेकर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। तिवारी ने कहा, ‘‘मामला अदालत में चल रहा है, इसलिए इस पर टिप्पणी करना सही नहीं होगा। हम चाहते हैं कि उच्च अदालत समग्र रूप से मामले का संज्ञान ले और उसे जो भी सही लगे उस निष्कर्ष पर पहुंचे।’’ मद्रास उच्च न्यायालय ने कल ‘विश्वरूपम’ के प्रदर्शन पर रोक लगा दी जिससे फिल्म के निर्माता-अभिनेता कमल हसन को झटका लगा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में सूत्रों का कहना है कि यदि सभी राज्यों की सरकार सीबीएफसी द्वारा पास की गयी फिल्मों को न दिखाने का निर्णय लें तो फिल्म निर्माता को 28-30 बार अपनी फिल्म को दिखाने की अनुमति लेनी होगी। (भाषा)
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