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Thursday, 31 January 2013 19:03 |
नयी दिल्ली (भाषा)। प्रमुख समाजशास्त्री आशीष नंदी ने जयपुर साहित्य उत्सव में कथित दलित विरोधी टिप्पणी के कारण उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द कराने के लिये आज उच्चतम न्यायालय की शरण ली।
न्यायालय इस याचिका पर कल सुनवाई करेगी। प्रधान न्यायाधीश अलतमस कबीर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि आशीष नंदी की याचिका पर कल सुनवाई की जायेगी। आशीष नंदी के वकील अमन लेखी ने इस याचिका पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध करते हुये कहा कि इसमें न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता है क्योंकि समाजशास्त्री की गिरफ्तारी की आशंका है। आशीष नंदी ने वकील गौरांग कांत के माध्यम से दायर याचिका में कहा, ‘‘प्राथमिकी दर्ज करना अपने आप में ही कानून का दुरुपयोग है और इस बात का खतरा है कि याचिकाकर्ता को संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 में प्रदत्त मौलिक अधिकारों से वंचित कर दिया जायेगा क्योंकि मायावती और अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के अध्यक्ष पी एल पूनिया सहित महत्वपूर्ण राजनीतिक हस्तियां उनकी
तुरंत गिरफ्तारी की मांग कर रही हैं।’’ नंदी ने जयपुर साहित्य उत्सव में एक परिचर्चा के दौरान कथित रूप से कहा था कि अन्य पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लोग अधिक भ्रष्ट हैं। इसके बाद ही आशीष नंदी के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं जनजाति :ज्यादतियों की रोकथाम: कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस कार्यवाही को चुनौती देते हुये 78 वर्षीय प्रमुख राजनीतिक समाजशास्त्री ने कहा है कि उनके खिलाफ बने माहौल में वह गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि वास्तव में जनता की नजर में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को अपमानित करने जैसी उनकी कोई दुर्भावनापूर्ण मंशा नहीं थी। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कानून के तहत कथित अपराध के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करना उन मौलिक अधिकारों के आधारभूत सिद्धांत के विरुद्ध है जिसमें अभिव्यक्ति की आजादी लोकतांत्रिक समाज की बुनियाद है।
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