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सच बोलने पर हटा दिया पोलित ब्यूरो से : अच्युतानंदन PDF Print E-mail
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Thursday, 31 January 2013 10:38

तिवनंतपुरम। माकपा के वयोवृद्ध नेता वीएस अच्युतानंदन ने बुधवार को कहा कि कुछ साल पहले उन्हें पार्टी के पोलित ब्यूरो से इसलिए हटा दिया गया क्योंकि उन्होंने भ्रष्टाचार के उस मामले के बारे में सच कहा था जिसमें पार्टी की राज्य इकाई के सचिव पिनयारी विजयन के खिलाफ जांच हुई है।
मामले की जांच सीबीआई ने की और सीबीआई की अदालत में यहां मुकदमा भी चल रहा है। 88 साल के अच्युतानंदन ने कहा कि उन्होंने पोलित ब्यूरो से कहा कि वे सच पर कायम रहेंगे और पार्टी के उस आधिकारिक रुख से सहमत नहीं हैं कि यह गढ़ा गया मामला है। अच्युतानंदन जब मुख्यमंत्री थे उन्हीं दिनों माकपा की शीर्ष इकाई से उन्हें विजयन के खिलाफ आरोपों के कारण हटाया था। यह आरोप 1997 में केरल के तीन विद्युत केंद्रों की साज-सज्जा के लिए कनाडा की कंपनी एसएनसी लवलीन को ठेका दिए जाने के संबंध में थे और तब विजयन बिजली मंत्री थे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने मलयालम चैनल मातृभूमि न्यूज को बताया-मुझे यह सच कहने के कारण पोलित ब्यूरो से हटाया गया कि एसएनसी लवलीन के साथ सौदे में कथित अनियमितता हुई। कैग ने यह पाया था। यह किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए गढ़ा गया मामला नहीं था। इन दिनों वे राज्य में विपक्ष के नेता हैं।


उन्होंने कहा-जब इस मसले पर पोलित ब्यूरो में चर्चा हुई तो मैंने उनसे कहा कि मैं सच पर ही कायम रह सकता हूं। मुझे उस पोलित ब्यूरो से हटा दिया गया जिसका मैं 24 साल से अधिक समय तक सदस्य था।
पिछले चार विधानसभा चुनावों में एलडीएफ का नेतृत्व करने वाले अच्युतानंदन ने कहा कि वे अपनी उम्र को देखते हुए अब और चुनाव नहीं लड़ेंगे। पिछले दो चुनावों में अच्युतानंदन को उनकी ही पार्टी में उनका विरोध करने वालों ने चुनाव मैदान से अलग रखने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे। अच्युतानंदन का विजयन के साथ लंबे समय से कई मुद्दों को लेकर टकराव चलता रहा है। कभी विजयन उनके शिष्य समझे जाते थे। लेकिन एसएनसी लवलीन मामले के बाद दोनों में टकराव तेज हो गया। माकपा की राज्य समिति ने पिछले दिनों अच्युतानंदन के निजी स्टाफ के तीन सदस्यों को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इस बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि यह फैसला उन्हें लक्ष्य कर किया गया था।
यह पूछने पर कि क्या पार्टी नेतृत्व का उन पर से भरोसा उठ चुका है, अच्युतानंदन ने कहा कि यह सोचना पार्टी का काम है। उन्होंने सवाल किया-अगर पार्टी का मुझ पर से भरोसा उठ गया है तो वह मुझे बाहर क्यों नहीं कर देती। (भाषा)

 
 

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