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बिहार के युवाओं के दिलों से तार जोड़ लिए अण्णा ने PDF Print E-mail
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Thursday, 31 January 2013 10:19

सुरेंद्र किशोर। गांधी और जेपी की कर्मभूमि में अण्णा हजारे ने बिहार के लोगों खासकर युवाओं से दिमाग के बदले दिल से बातचीत की। इसके साथ ही दिल के तार जुड़ने लगे।ऐतिहासिक गांधी मैदान की बुधवार की सभा में भाषण के साथ श्रोताओं से संवाद भी हुआ। सभा में हालांकि सभी समुदाय व आयु वर्ग के लोग थे। लेकिन युवा अधिक थे। अण्णा के अभियान के प्रति उनमें भारी उत्साह दिखा।
खुद चल कर आए हजारों व्यवस्था विरोधी लोगों ने अण्णा के प्रस्तावित कार्यक्रमों  के प्रति भी उत्साह दिखाया। ऐसा इस बात के बावजूद हुआ कि मंच से घोषणा की गई कि अण्णा नीत प्रस्तावित जनतंत्र मोर्चा चुनाव में शामिल नहीं होगा। यानी भीड़ में  चुनाव के टिकटार्थी नहीं थे। जब जेपी आंदोलन चल रहा था, उस समय के युवा भी यह नहीं सोचते थे कि यह आंदोलन उन्हें संसद या विधानसभा में पहुंचा देगा। अण्णा ने कहा कि जनतंत्र मोर्चा जनता की हर जरूरी सेवा करेगा। अण्णा हजारे ने व्यवस्था परिवर्तन के लिए जिस देशव्यापी आंदोलन के फैसले की घोषणा की उसके प्रति भी सभा में उत्साह देखा गया। इस उत्साह को देख कर तो अण्णा ने कहा कि पटना के युवाओं का जोश देख कर मैं खुद युवा हो गया हूं।
दलगत ताकत, पैसे के बल पर हजारों वाहनों के जरिए और दूसरे उपायों से समय-समय पर भारी भीड़ गांधी मैदान में जुटाई जाती रही है। उस भीड़ के मुकाबले संख्या के लिहाज से भीड़ थोड़ी कम थी। लेकिन इस भीड़ में भेड़चाल वाले नहीं बल्कि खुद कुछ करने का हौसला रखने वाले लोग अधिक थे। आज की जिस पीढ़ी ने जेपी की छोटी-बड़ी जनसभाएं नहीं देखी हैं, उन्हें अण्णा की इस सभा में उसकी एक झलक मिल गई।
अण्णा ने अपने भाषण में बार-बार गांधी और जेपी के नाम लिए। उन्होंने यह भी कहा कि गांधी


और जेपी के बगल में बैठने की भी मेरी हैसियत नहीं है। लेकिन मैं आपकी मदद से उनके अधूरे सपने को पूरा करने का प्रयास करूंगा। इसके लिए आज की पीढ़ी को बीज बनना पड़ेगा। जो अनाज बीज नहीं बनता, उसे चक्की में पिसने के लिए भेज दिया जाता है। जो बीज बनता है, उसका विस्तार होता है।
जेपी ने भी बिहार आंदोलन के समय छात्रों से अपील की थी कि वे आंदोलन को एक साल देने के लिए अपनी कक्षाएं छोड़ दें। अनेक छात्रों ने ऐसा किया भी था। अण्णा की साख का असर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की टिप्पणी में भी दिखा। उनके भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के प्रति एकजुटता दिखाते हुए नीतीश ने कहा कि अण्णा साहब जो कुछ कर रहे हैं, उसे करने की आज जरूरत है। क्योंकि सरकारें कई बार चाहते हुए भी भ्रष्टाचार उन्मूलन के कई जरूरी काम नहीं कर पाती हैं।
गांधी मैदान के सभा मंच पर बापू के खून से सनी मिट्टी की मौजूदगी ने भी भावनात्मक माहौल बनाया। उस मिट्टी को साक्षी मानकर नया भारत बनाने के संकल्प की शपथ सभा में ली गई। मंच से कहा गया कि यह आंदोलन सिर्फ जन लोकपाल का ही काम नहीं करेगा, बल्कि देश में गांधी-जेपी के सपनों की ऐसी न्यायप्रिय व्यवस्था       बाकी पेज 8 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी ८
बनाने की कोशिश करेगा जिसमें सब तरह के लोग खुश रहें और सबको न्याय व हक मिले। दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद गांधी ने सबसे पहले बिहार के चंपारण से ही देश सेवा शुरू की थी। बिहार के अनेक लोगों ने गांधी का साथ दिया था। चुनाव की राजनीति से दूर रहने वाले जय प्रकाश नारायण को भी बिहार आंदोलन में भारी जन समर्थन मिला था। अण्णा की बुधवार की सभा में जुटी भीड़ के उत्साह से भी यह लगा कि जनतंत्र मोर्चा के अभियान को भी बिहार से भारी समर्थन मिलेगा।

 
 

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