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मधु कोडा के खिलाफ 45 दिन में जांच पूरी करे: सुप्रीम कोर्ट PDF Print E-mail
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Tuesday, 29 January 2013 21:18

नयी दिल्ली । उच्चतम न्यायालय ने काले धन को वैध बनाने में मधु कोडा की जांच पूरी करने के लिये प्रवर्तन निदेशालय को आज 45 दिन का समय दे दिया।

उच्चतम न्यायालय ने काले धन को वैध बनाने से संबंधित मामले में झारखंड के पूर्व मुख्य मंत्री मधु कोडा की भूमिका की जांच पूरी करने के लिये प्रवर्तन निदेशालय को आज 45 दिन का समय दे दिया।
न्यायमूर्ति एच एल दत्तू और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की खंडपीठ ने प्रवर्तन निदेशालय का अनुरोध स्वीकार करते हुये कहा, ‘‘हम महसूस करते हैं कि यह मुनासिब आग्रह है।’’
प्रवर्तन निदेशालय ने न्यायालय को सूचित किया कि वे मधु कोडा के निकट सहयोगी अनिल बस्तावड़े को इंडोनेशिया से भारत लाने की प्रक्रिया में हैं ताकि गैरकानूनी तरीके से संपदा अर्जित करने के मामले में इन दोनों के संबंधों को स्थापित किया जा सके।
न्यायालय ने मधु कोडा की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय को जांच पूरी करने का समय दिया। इस मामले में मधु कोडा नवंबर, 2009 से रांची की जेल में बंद हैं।
अतिरिक्त सालिसीटर जनरल हरेन रावल का कहना था कि प्रवर्तन निदेशालय बस्तावड़े को गिरफ्तार करने की प्रक्रिया में है। इस कथित छद्म कारोबारी को इंटरपोल की नोटिस के आधार पर इंडोनेशिया में हिरासत में लिया गया है।
केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने प्रवर्तन निदेशालय के अनुरोध पर 48 वर्ष्ज्ञीय कारोबारी बस्तावड़े के नाम रेड कार्नटर नोटिस जारी किया था।
प्रवर्तन निदेशालय इस कारोबारी को हिरासत में लेकर बतौर मुख्यमंत्री मधु कोडा के कार्यकाल के दौरारन हुयी कथित वित्तीय अनियमितताओं के बारे में उससे पूछताछ करना चाहता है।
कोडा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफडे और उदय ललित ने प्रवर्तन निदेशालय के अनुरोध


का विरोध करते हुये कहा कि निदेशालय ने निचली अदालत में कहा था कि इस मामले में उसकी जांच पूरी हो गयी है लेकिन अब वह और समय चाहता है।
कोडा के वकीलों का कहना था कि प्रवर्तन निदेशालय का दावा है कि बस्तावड़े की गिरफ्तारी के साथ ही जांच पूरी हो जायेगी लेकिन किसी को उसके बारे में मालूम नहीं है।
लेकिन अतिरिक्त सालिसीटर जनरल ने कहा कि बस्तावड़े की गिरफ्तारी के बाद प्रवर्तन उसके और कोडा के रिश्तों को सिद्ध कर दिया जायेगा।
न्यायालय ने कोडा की जमानत याचिका पर सुनवाई चार सप्ताह के लिये स्थगित कर दी है।
मधु कोडा ने झारखंड उच्च न्यायालय से जमानत याचिका खारिज होने के बाद शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
झारखंड के इस पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार और दूसरे आरोपों में उनकी भूमिका को लेकर मामले दर्ज हैं। कोडा को इससे पहले चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन और कथित रूप से आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में जमानत मिल गयी थी।
झारखंड की अदालत ने 3549.72 करोड़ रुपए के धन शोधन से संंबंधित मामले में धन शोधन कानून की धारा चार के तहत मधु कोडा के खिलाफ 25 सितंबर, 2012 को अभियोग निर्धारित किये थे।
प्रवर्तन निदेशालय का दावा है कि कोडा ने इस रकम में से 1340 करोड रुपए का गैरकानूनी तरीके से निवेश किये हैं।
निदेशालय को संदेह है कि कोडा और उसके सहयोगियों की ओर से बस्तावड़े ने ही दुबई तथा कुछ अन्य देशों में गैरकानूनी तरीके से निवेश किया है।
निदेशालय ने अपने आरोप पत्र में उसके नाम को शामिल किया है और उसने मधु कोडा के कार्यकाल के दौरान कथित गैरकानूनी गतिविधियों से अर्जित धन संयुक्त अरब अमीरात में संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल किये जाने को भी रेखांकित किया है। (भाषा)

Last Updated on Tuesday, 29 January 2013 21:35
 
 

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