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Tuesday, 29 January 2013 10:22 |
ढाका। भारत और बांग्लादेश ने सोमवार को प्रत्यर्पण व वीजा प्रणाली को सरल बनाने के समझौते पर दस्तखत किए।
इस बेहद महत्त्वपूर्ण संधि पर दस्तखत से बांग्लादेश की जेल में कैद उल्फा के स्वयंभू महासचिव अनूप चेतिया सहित पूर्वोत्तर के कई अलगाववादियों को भारत लाने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और उनके बांग्लादेशी समकक्ष मोहिदुद्दीन खान आलमगीर ने द्विपक्षीय वार्ता के खत्म होने के बाद इस समझौते पर दस्तखत किए। शिंदे ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इन संधियों से सुरक्षा व दोनों पक्षों के लोगों के बीच संपर्क के क्षेत्रों में रिश्ते मजबूत होंगे। इससे पहले प्रधानमंत्री शेख हसीना की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक से बाहर आकर कैबिनेट सचिव मोहम्मद मुशर्रफ हुसैन भुइयां ने संवाददाताओं से कहा कि इस संधि से दोषी करार दिए गए और मुकदमे का सामना कर रहे अपराधियों के प्रत्यर्पण का रास्ता साफ होगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह संधि राजनीतिक अपराधों के आरोपियों पर लागू नहीं होगी, बल्कि इसके दायरे में हत्या व अन्य दूसरे संगीन अपराध आएंगे। भुइयां ने कहा कि छोटे किस्म के अपराधों के मामले में एक साल से कम की सजा पाए भगोड़े इस संधि के तहत वांछित नहीं होंगे। बांग्लादेशी कैबिनेट की ओर से प्रत्यर्पण संधि को मंजूरी देने
से एक हफ्ते पहले भारत ने बांग्लादेश के साथ समझौते पर दस्तखत को मंजूरी दी। बांग्लादेश के गृह मंत्री ने पिछले महीने नई दिल्ली का दौरा किया था और इसी कड़ी में अब शिंदे ढाका आए हैं। दोनों देशों के बीच हुए वीजा संबंधी समझौते के बाद अब कारोबारियों, छात्रों, मरीजों, वरिष्ठ नागरिकों और 12 साल से कम उम्र के बच्चों के एक दूसरे के यहां आने जाने से पाबंदियां हट जाएंगी। भारत और बांग्लादेश ने पिछले साल दिसंबर में प्रत्यर्पण संधि पर दस्तखत के लिए सहमति जताई थी। उसी वक्त वीजा प्रणाली को सहज बनाने को लेकर भी सहमति बनी थी। उल्फा नेता चेतिया को भारत के हवाले करने से जुड़े एक सवाल पर आलमगीर ने पिछले महीने दिल्ली में कहा था कि बांग्लादेश अपना वादा पूरा करेगा, लेकिन मामला अदालत के समक्ष लंबित है। उधर, दिल्ली में गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि प्रत्यर्पण संधि के बाद चेतिया, त्रिपुरा के उग्रवादी नेता विश्वमोहन देव बर्मन, एनडीएफबी नेता थुलुंगा उर्फ तेनसू नारजेरी और बांग्लादेश में छिपे पूर्वोत्तर के कई दूसरे उग्रवादियों के प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो जाएगा। भारत लंबे समय से चेतिया के प्रत्यर्पण के लिए दबाव बनाता आ रहा है। उसे 1997 में गिरफ्तार किया गया था और उसके बाद से वह ढाका की एक जेल में बंद है। (भाषा)
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