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Monday, 28 January 2013 18:21 |
जयपुर। जयपुर साहित्य महोत्सव में महिलाओं पर केंद्रित एक सत्र में पैनल में मौजूद सभी महिला प्रतिभागियों ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों को छीनने के लिए लड़ाई लड़नी होगी तथा उन्हें संघर्ष के बिना इसकी उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
इस सत्र में स्त्री..पुरूषों की भूमिका, प्रतिबंध और परिभाषा पर विचार विमर्श किया गया। राजस्थान की पहली जेल अधीक्षक और कवि ने आज यहां कहा, ‘‘आपको जिस चीज की आकांक्षा है उसे पाने के लिए आपको लड़ना पड़ेगा। महिलाओं को समाज से अपना हिस्सा लेने के लिए संघर्ष करना चाहिए।’’ ऐसी ही भावनाओं को जाहिर करते हुए लेखिका लता शर्मा ने महिलाओं से अनुरोध किया कि वे समाज से अपने अधिकार छीन लें। उन्होंने कहा कि
समाज ने महिलाओं सहित सभी को यह स्वीकार करने के तैयार कर लिया है कि महिलाओं का दर्जा पुरूषों से कमतर है। ‘‘स्त्री होकर सवाल करती हो’’ शीर्षक सत्र में लता ने आज यहां कहा, ‘‘अधिकार किसी को ऐसे ही नहीं मिल जाते। आपको लड़कर और छीनकर अपने अधिकार लेने होते हैं।’’ शर्मा की रचनाओं का कई भाषा में अनुवाद हो चुका है। कहानी लेखक दुष्यंत ने सत्र का संचालन करते हुए कहा कि महिलाएं ही एकमात्र ऐसा उत्पीड़ित समुदाय हैं जो अपने उत्पीड़कों के साथ बेहद नजदीकी संबंध रखते हुए जीवन बसर करता है। महिलाएं क्या पहनें और क्या करें, इस बारे में पुरूष और समाज के सवाल करने के अधिकार पर समाज सेविका सुशीला शिवरान ने प्रश्नचिन्ह लगाया। (भाषा)
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