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पटना में अण्णा की जनतंत्र रैली पर सभी की निगाहें PDF Print E-mail
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Monday, 28 January 2013 09:57

सुरेंद्र किशोर। पटना में जनतंत्र रैली की तैयारियां गति तेज हो गई हैं। तीस जनवरी को  ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित रैली को अण्णा हजारे संबोधित करेंगे। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर आयोजित इस रैली को लेकर भारी उत्सुकता है। राजनीतिक रूप से जागरूक बिहार में ऐसे भी भ्रष्टाचार विरोधी रैलियों के प्रति उत्सुकता कुछ अधिक ही रहती है। इस पर अण्णा हजारे को उसमें शामिल होना हो, तब तो कहना ही क्या?
रैली की तैयारियों को गति देने के लिए अण्णा के सहयोगी पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह रविवार को पटना पहुंच गए। हवाई अड्डे पर लोगों ने गर्मजोशी से उनकी अगवानी की। रैली में शमिल होने के लिए बिहार के बाहर से भी लोग पटना पहुंचने शुरू हो गए हैं। भ्रष्टाचार से पीड़ित लोगों में इस रैली के प्रति विशेष तौर से उत्सुकता है। संकेत हैं कि भीड़ अच्छी-खासी होगी। रैली  की तैयारी के लिए वीके सिंह दो बार पहले भी बिहार का दौरा कर चुके हैं। वे अधिक से अधिक लोगों और संगठनों से मिल रहे हैं। यह एक अच्छा संकेत है कि सिंह से मिलने के लिए जो लोग जुट रहे हैं, उनमें लगभग सभी जाति-समुदाय के लोग होते हैं। देखना है कि इस ऐतिहासिक गांधी मैदान से अण्णा हजारे देश को कौन सा संदेश देते हैं। संकेत मिले हैं कि वे उस दिन अपनी अगली कार्य योजना का विवरण रैली में देंगे।
अण्णा हजारे ने अपने अभियान को गति देने के लिए बिहार को चुना है। इससे भी बिहार के लोग गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। याद रहे कि बिहार की धरती महात्मा गांधी की कर्म भूमि और जेपी की जन्म भूमि रही है। पटना के गांधी मैदान का नाम  पहले बांकीपुर लॉन था। पर देश के विभाजन के समय दंगों पर काबू पाने के लिए गांधी जी लंबे समय तक बिहार में रहे थे। वे जब तक पटना में थे, बांकीपुर लॉन में ही प्रार्थना सभाएं कीं। बाद में उनके नाम पर इस मैदान का नाम पड़ गया। जय प्रकाश नारायण ने 1974-75 के आंदोलन के समय  इस मैदान में कई बड़ी -बड़ी जनसभाओं को संबोधित किया था।
गांधी मैदान का इन दिनों सौदर्यीकरण हो रहा है। उसमें गांधी जी  की 45 फीट ऊंची मूर्ति लगाने की योजना है। मूर्ति बन कर तैयार है। इसलिए किसी


रैली या सभा के लिए फिलहाल इस मैदान की बुकिंग बंद है। फिर भी असामान्य तौर पर  यह मैदान जनतंत्र रैली के लिए मिल गया। इसके लिए वीके  सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सार्वजनिक रूप से धन्यवाद दिया है। सिंह ने यह भी कहा है कि इस रैली का उद्देश्य भ्रष्टाचार से त्रस्त लोगों को एकत्र करना और जरूरी परिवर्तन के लिए देश को तैयार करना है।
जयप्रकाश नारायण ने अपनी जान पर खेल कर भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चलाया था। खुद अण्णा हजारे ने भी देश की जनता को यह भरोसा दिलाया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मरते दम तक लड़ेंगे। भ्रष्टाचार ने शासन और राजनीति का चरित्र ही बदल दिया है। इस देश में संविधान के मुताबिक काम नहीं चल रहा है।
भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के इस सबसे बड़े नेता की यह बात खास तौर पर बिहारवासियों को आकर्षित कर रही  है। बिहार आंदोलन की उर्वर भूमि रहा है। यह भी महत्वपूर्ण है कि जय प्रकाश आंदोलन के कुछ पुराने नेता व कार्यकर्तागण भी अण्णा के इस अभियान में शामिल हो चुके हैं।
एक खबर के मुताबिक अण्णा हजारे महात्मा गांधी के शहीद स्थल की घास भरी मिट्टी लेकर पटना के गांधी मैदान पहुंचेंगे। यह लोगों की भावना को स्पर्श करने वाली घटना होगी। इस बीच रैली की तैयारी के सिलसिले में टीम अण्णा ने कुछ अलग तरह के प्रयोग किए हैं। यह बिहार के लिए नया प्रयोग है। वीके सिंह ने अपने पिछले दौरे में ही उनसे मिलने गए उत्साही लोगों से कहा  था कि वे रैली के लिए न तो पैसे दें और न ही चंदा एकत्र करें। वे पर्चों और पोस्टरों पर खुद ही खर्च करें। ऐसा ही हो रहा है। अण्णा के एक समर्थक आमी गांव के विजय कुमार सिंह ने बताया कि रैली के प्रचार के लिए उन्होंने अपने खर्चे से 15 हजार पर्चे छपवाए हैं जिन्हें बांटा जा रहा है। ऐसा काम और इससे भी अधिक व्यापक पैमाने पर कुछ अन्य लोग भी कर रहे हैं। रैली की तैयारी में लगे डा.मनीष कुमार के मुताबिक कुछ लोग होर्डिंग का खर्च उठा रहे हैं तो कुछ अन्य लोग टीवी चैनलों पर रैली का विज्ञापन करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रैली के नाम पर चंदे के दुरूपयोग को रोकने के लिए ऐसा हो रहा है।


 
 

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