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साहित्य उत्सव बीच में छोड़कर नंदी रवाना PDF Print E-mail
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Monday, 28 January 2013 09:56

जनसत्ता ब्यूरो व एजंसियां, जयपुर/नासिक। जयपुर साहित्य उत्सव में लेखक आशीष नंदी के दलितों को भ्रष्ट बताने वाले बयान पर बवाल थम नहीं रहा है। रविवार को साहित्य उत्सव को बीच में छोड़कर नंदी जयपुर से रवाना हो गए। उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर कई संगठनों ने धरना-प्रदर्शन किया। साहित्य उत्सव के चौथे दिन रविवार को 34 सत्र आयोजित हुए। मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने उनके शनिवार के सत्र की वीडियो फुटेज मंगवाई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नंदी की विवादास्पद टिप्पणी को मानसिक दिवालिएपन का उदाहरण बताया है। वहीं महाराष्ट्र के नासिक में उनके खिलाफ एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इस मामले में संघर्ष के लिए महाराष्ट्र के कुछ राजनीतिक दलों ने बहुजन समाज संघर्ष समिति का गठन किया है।
पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त गिरराज मीणा ने जयपुर में कहा,‘मामले की जांच जारी है। हमने कल के सत्र के वीडियो फुटेज मंगवाए हैं जिसमें उन्होंने टिप्पणी की है। उनकी सफाई को भी रिकार्ड में शामिल किया जाएगा।’ उन्होंने कहा,‘हमें आयोजकों ने सूचित किया कि नंदी आज शहर से रवाना हो गए। लेकिन शुरुआती जांच पूरी होने पर समुचित कार्रवाई की जाएगी।’ नंदी को समारोह में ‘हिंदी इंग्लिश भाई भाई’ सत्र को रविवार सुबह संबोधित करना था। लेकिन वे नहीं आए। सोमवार को इस साहित्य समारोह का समापन होगा। 
जयपुर साहित्य उत्सव स्थल के बाहर रविवार को अनुसूचित जाति और जनजाति के कई संगठनों ने धरना देकर नंदी की टिप्पणी पर विरोध जताया। इन वर्गों के छात्रों ने भी उत्सव स्थल के बाहर प्रदर्शन किया। कई अन्य स्थानों पर भी टिप्पणी को लेकर नाराज लोगों के धरने और प्रदर्शन चल रहे हैं। टिप्पणी से नाराज संगठनों की मांग है कि नंदी को एससी एसटी एक्ट की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया जाए। राष्ट्रीय मीणा महासभा के अध्यक्ष राजपाल मीणा का कहना है कि पुलिस जब तक नंदी को गिरफ्तार नहीं करेगी विरोध का सिलसिला जारी रहेगा। एससी/एसटी राजस्थान मंच ने शहर में प्रदर्शन किया। मंच ने ही नंदी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। एससी एसटी कर्मचारी संगठन ने नंदी के खिलाफ जल्द कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि टिप्पणी किसी भी समाज के लिए सही नहीं है। नंदी के खिलाफ रविवार को भाजपा से


जुड़े युवा मोर्चे के कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन किया।
टिप्पणी के बाद विवाद बढ़ने पर उत्सव के आयोजकों ने नंदी से सफाई भी दिलवाई थी। इसमें नंदी ने कहा कि उनकी टिप्पणी को गलत अर्थों में लिया गया है।
दूसरी तरफ साहित्य उत्सव के चौथे दिन रविवार को 34 सत्र आयोजित हुए। उत्सव में रविवार को लोगों का जुड़ाव अच्छा खासा रहा। नंदी की टिप्पणी के बाद रविवार को विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए सुरक्षा के भारी इंतजाम किए गए। इन सत्रों में कई विषयों पर साहित्यकार अशोक वाजपेयी और रविश कुमार के साथ कई लेखकों ने भाषाओं की विविधता पर संवाद किए। इसमें भाषा के कई पहलुओं पर चर्चा के दौर चले। हिंदी-इंग्लिश भाई-भाई और एक भाषा हुआ करती थी जैसे विषयों के सत्र में लोगों की खूब भीड़ उमड़ी। उत्सव में गीत, गजल, क विता, कहानी आदि पर कई अलग- अलग सत्रों में रोचक संवादों के दौर चले।
वहीं नासिक में एक नागरिक ने नंदी के खिलाफ उत्पीड़न रोकथाम कानून के तहत रविवार को शिकायत दर्ज कराई। सरकारवाड़ा पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया,‘समाधान जगताप ने सरकारवाड़ा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। इसमें अनूसचित जाति और जनजाति (उत्पीड़न रोकथाम) कानून के तहत नंदी की गिरफ्तारी की मांग की गई है।’ इससे पूर्व एक सर्वदलीय शिष्टमंडल ने पुलिस को एक ज्ञापन सौंप कर लेखक के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की मांग की। शिष्टमंडल में एमएनएस, शिवसेना, भाजपा, आरपीआई और बहुजन समाज संघर्ष समिति के तत्वावधान में दलित संगठनों के नेता शामिल थे। इस बीच राकांपा सांसद समीर भुजबल ने एक बयान में कहा कि विभिन्न पार्टियों के नेताओं ने भुजबल फार्म पर बैठक कर बहुजन समाज संघर्ष समिति का गठन किया।
वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को कहा कि आशीष नंदी की विवादास्पद टिप्पणी मानसिक दिवालियेपन का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि गहलोत ने कहा कि किसी वर्ग को निशाना बनाना उचित नहीं है। उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि कोई व्यक्ति मानसिक संतुलन गंवाने के बाद ही ऐसा बयान दे सकता है। उन्होंने कहा,‘लोगों को मालूम है कि कौन रिश्वत देता है और लेता है। अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को जब रिश्वत देने की क्षमता है ही नहीं तो वे कैसे भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे सकते हैं।’

 
 

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