|
Friday, 25 January 2013 18:37 |
नई दिल्ली। बांग्लादेश के विवादास्पद लेखक सलमान रूश्दी का कहना है कि बडे पर्दे पर अपने ही उपन्यास ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रेन’ के बारे में बोलने की पेशकश बहुत ही आनंददायक थी लेकिन वह इस बात को लेकर परेशान भी थे कि इसकी वजह से कहीं फिल्म की भद्द न पिट जाए।
बुकर पुरस्कार विजेता 65 वर्षीय इस लेखक ने कहा कि उनका ही वायसओवर रखने का फैसला देर से आया। रूश्दी ने ही दीपा मेहता के निर्देशन में बनी इस फिल्म की पटकथा भी लिखी है। उन्होंने यहां कल रात प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में कहा, ‘‘मैंने कथावाचक बनने का फैसला नहीं किया, बल्कि यह दीपा का विचार था। मैं यह नहीं करना चाहता था। हमने बिना वायसओवर के फिल्म बनाने का प्रयास किया था लेकिन
जब हमने एसेम्बलिंग का काम शुरू किया तब हमें लगा कि वायसओवर जरूरी है।’’ रूश्दी ने कहा, ‘‘दीपा ने दो अभिनेताओं से यह कराने की कोशिश की लेकिन अंतत: उन्होंने मुझसे कहा, ‘आपको ही यह करना चाहए।’ यह बहुत हर्षप्रद था लेकिन मैं परेशान भी हो गया क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि मैं कुछ ऐसा कर बैठूं जिससे फिल्म की भद्द पिट जाए। मुझे लगा कि यदि वाकई यह मेरे लिए परेशानी वाली बात है तो मुझे इसे आजमाना चाहिए और मैं आगे बढ़ गया। ’’ इस पुस्तक के पहली बार प्रकाशित होने के 30 साल बाद इस पर फिल्म बन रही है। इसमें सत्य भाभा, सिद्धार्थ, शाबना आजमी , अनुपम खेर, रजत कपूर, कुलभूषण खरबंदा, सोहा अली खान औेर सोमा विश्वास हैं। फिल्म एक फरवरी को रिलीज होगी।
|