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Friday, 25 January 2013 10:08 |
जनसत्ता ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कंपनियों को कोयला ब्लाक आबंटित करने के केंद्र्र के अधिकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसे बहुत से कानूनी स्पष्टीकरण देने होंगे क्योंकि सांविधिक कानून के तहत इसका अधिकार सिर्फ राज्यों को ही है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्र्र खदान और खनिज कानून को नजरअंदाज नहीं कर सकता है, जिसने केंद्र्र को कंपनियों को कोयला ब्लाक आबंटित करने का कोई अधिकार नहीं दिया है। इस बीच सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि कोयला ब्लाक आबंटन मामले की अब तक की जांच से पता चला है कि सरकारी संसाधनों के आबंटन में सरकारी प्राधिकारियों ने अनियमितता की और इस समय करीब 300 कंपनियां उसकी जांच के दायरे में हैं। न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा और न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर की खंडपीठ ने कोयला आबंटन में अनियमितताओं को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सरकार से कहा कि उसे दूसरे कानूनों, विशेषकर कोयला खदान (राष्ट्रीयकरण) कानून, का गहराई से अध्ययन करके यह पता लगाना होगा कि क्या उसे इन संसाधनों के आबंटन का अधिकार है। जजों ने कहा कि खदान और खनिज (विकास व नियमन) कानून 1957 के तहत सरकार को कोई भी अधिकार नहीं है। इस कानून से आगे निकलने का कोई प्रावधान नहीं है। आपको बहुत कानूनी स्पष्टीकरण देने होंगे। अदालत ने कहा-सवाल यह है कि क्या केंद्र्र सरकार को कानून के तहत अधिकार है और क्या समूचे विधाई तंत्र को नजरअंदाज करने का उसे अधिकार है। क्या आप कानून के विधाई प्रावधानों से आगे जा सकते हैं। कदाचित कानूनी नजरिए से इसमें बहुत संदेह है। अटार्नी जनरल गुलाम वाहनवती ने कहा कि इन सवालों पर वे बगैर सोच विचार के जवाब नहीं देना चाहते। उन्होंने इन सवालों पर गौर करने के लिए कुछ समय देने का आग्रह किया। अदालत ने जवाब देने के लिए सरकार को छह हफ्ते का वक्त दे दिया। वकील मनोहर लाल शर्मा के साथ ही पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एन गोपालस्वामी, पूर्व नौसेनाध्यक्ष एल रामदास, पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रमण्यम आदि ने इन याचिकाओं में कोयला ब्लाक आबंटन प्रकरण की जांच के लिए विशेष दल गठित करने का अनुरोध किया है। खदान और खनिज विकास नियामक कानून की धारा 10(1) के तहत सरकार के अधीन खनिज संपदा से संबंधित किसी भी भूमि पर खनन के लिए निर्धारित शुल्क के साथ आवेदन राज्य सरकार के सामने करना होगा। यह आवेदन मिलने पर राज्य सरकार कानून के प्रावधानों और इसके तहत बने नियमों के तहत पट्टे की अनुमति दे सकती है। शीर्ष अदालत ने सरकार से यह भी सवाल किया है कि छानबीन समिति ने कैसे कोयला ब्लाक के आबंटन का निर्णय किया। जैसा कि कोयला सचिव के हलफनामे में कहा
गया है। कोयला सचिव ने अपने हलफनामे में कहा है कि कभी-कभी छानबीन समिति ने आबंटन किया है। अदालत ने कहा कि यह न्यायेतर लगता है। इस बीच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि कोयला ब्लाक आबंटन मामले की अब तक की जांच से पता चला है कि सरकारी संसाधनों के आबंटन में सरकारी प्राधिकारियों ने अनियमितता की और इस समय करीब 300 कंपनियां उसकी जांच के दायरे में हैं। शीर्ष अदालत में दाखिल हलफनामे में जांच एजेंसी ने कहा है कि 1993 से और विशेष रूप से 2006 से 2008 के दौरान कोयला आबंटन के मामले में प्रत्येक कंपनी के खिलाफ जांच की जा रही है। हलफनामे के मुताबिक जांच एजेंसी को पता चला है कि 1993 से ही कोयला ब्लाक आबंटन और खदानों के विकास के लिए ठेका देने व सरकार के अधीन वर्ग के तहत सार्वजनिक उपक्रमों के साथ संयुक्त उपक्रम बनाने में अनियमितताएं हुई हैं।’ हलफनामे में कहा गया है,‘प्राधिकारियों ने कोयला मंत्रालय की ओर से सरकारी वितरण वर्ग के तहत आबंटित कोयला ब्लाक की खदानों के विकास के लिए ठेका देने में नियमों और प्रक्रिया का पालन नहीं किया।’ जांच एजेंसी ने कहा है कि जांच ब्यूरो के निदेशक ने करीब एक लाख 60 हजार पन्नों की सात सौ फाइलों की छानबीन के लिये जांचकर्ताओं का विशेष दल गठित किया है। हलफनामे में कहा गया,‘संयुक्त उद्यम बनाने के लिए संबधित प्राधिकारियों ने पारदर्शी प्रणाली नहीं अपनाई और इस प्रक्रिया में अपेक्षित सावधानी नहीं बरती गई। निजी पक्षों के साथ संयुक्त उद्यमों या खदानों के विकास के ठेके देने में कुछ लोक सेवकों के निहित स्वार्थ थे। यह भी संदेह है कि इस प्रक्रिया में कई निजी कंपनियों को अनावश्यक लाभ भी मिला है।’ हलफनामे के मुताबिक इस मामले की जांच में एजेंसी ‘व्यापक और विस्तृत’ दृष्टिकोण अपना रही है और संसद में खदान और खनिज संशोधन विध्ोयक, 2008 पेश करने में विलंब के बारे में आरोपों पर भी गौर कर रही है। हलफनामे में कहा गया है,‘तीन सौ से अधिक कंपनियों को कोयला ब्लाक के आबंटन से संबंधित मामलों की तफतीश पर विचार हो रहा है। अभी तक 12 कंपनियों के मामले में जांच पूरी हो चुकी है और इनमें से नौ कंपनियों के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है।’ जांच एजेंसी ने न्यायालय के सामने उन कंपनियों की सूची भी पेश की जिनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। इनमें जस इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल प्रा लि., एएमआर आयरल एंड स्टील प्रा लि, जेएलडी यवतमाल एनर्जी लि, नवभारत पावर लि, विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लि, ग्रेस इंडस्ट्रीज लि, विकाश मेटल एंड पावर लि, ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और कमल स्पॉन्ज स्टील एंड पावर लिमिटेड कंपनियां शामिल हैं। (भाषा)
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