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Wednesday, 13 February 2013 21:50 |
कोच्चि। सूर्यानेल्ली सामूहिक बलात्कार कांड के पूर्व जांच अधिकारी के इट्टूप ने आज राज्यसभा के उपसभापति पी जे कुरियन का समर्थन किया और कहा कि वह इस कुख्यात कांड में शामिल नहीं थे जो पिछले 17 सालों से उनका पीछा कर रहा है।
इस कांड की जांच का प्रभार सिबी मैथ्यू के हाथ में लेने से पहले जांच दल की अगुवाई करने वाले इट्टूप ने यहां संवाददाताओं से कहा कि कुरियन इस मामले में शामिल नहीं थे। ई के नयनार की अगुवाई वाली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार के दौरान जांच दल से हटा दिए गए पूर्व पुलिस अधीक्षक ने दावा किया कि जब उन्होंने कुरियन को इस कांड में फंसाने से इनकार कर दिया तब उन्हें जांच से हटा दिया गया। उडुपी में रहने वाले इट्टूप ने कहा कि उन्होंने मामले की गहन एवं निष्पक्ष जांच की। कुरियन 19 फरवरी, 1996 को कभी कुमिली गेस्टहाउच्च्स नहीं गए जैसा कि पीड़िता ने आरोप लगाया है। उन्होंने इस सिलसिले में व्यापक जांच की। इट्टूप ने आरोप लगाया कि जांच से पता चला कि पीड़िता सच नहीं बोल रही और उसे कोई उकसा रहा है। इट्टूप जब संवाददाता सम्मेलन से लौट रहे थे तब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी :भाकपा: की युवा शाखा आॅल इंडिया यूथ फ्रंट के कुछ कार्यकर्ताओं ने उनकी कार रोकी। उनमें से चार को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। कुरियन ने हमेशा से इस आरोप और उनके इस्तीफे की विपक्ष की मांग को खारिज किया है । उनका कहना है कि यह एक ऐसा मामला है जिसपर
उच्च न्यायालय पहले ही फैसला दे चुका है। इड्डुकी जिले के सूर्यानेल्ली की इस लड़की को जनवरी, 1996 में अगवा किया गया था ओर उसे केरल में जगह जगह ले जाया गया एवं विभिन्न व्यक्तियों ने उसका बलात्कार किया। लड़की ने पिछले सप्ताह उच्चतम न्यायालय को पत्र लिखा था और मांग की थी कि वह कुरियन को के खिलाफ सभी आरोपों को खारिज करने वाले पिछले आदेश की समीक्षा करें। इसी बीच केरल उच्च न्यायालय वकील संघ ने पूर्व न्यायाधीश आर बसंत के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने को लेकर मीडिया और नेताओं की आलोचना की।न्यामयूर्ति बसंत ने लड़की के बारे में अपनी टिप्पणी से विवाद खड़ा कर दिया था। संघ ने अपनी असामान्य महासभा की बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया। न्यायमूर्ति बसंत ने न्यायमूर्ति के ए अब्दुल गफ्फूर के साथ मिलकर वर्ष 2005 में फैसला सुनाया था। उन्होंने 35 आरोपियों को बरी कर दिया जबकि एक की सजा बरकरार रखी थी। उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में बरी किये जाने के फैसले को खारिज कर दिया। कुछ दिन पहले एक खबरिया चैनल ने न्यायमूर्ति बसंत के साथ एक निजी बातचीत प्रसारित की थी। न्यायमूर्ति बसंत ने कहा कि सूर्यानेल्ली कांड की लड़की बाल वेश्या के रूप में इस्तेमाल की गयी जो कि बलात्कार नहीं था। उनके इस बयान की केरल में भारी निदां की गयी। डीवाईएफआई, युवा मोर्चा, महिला संगठनों ने उनके पुतले फूंके। आज ज्यादातर वकीलों ने छिपकर कैमरे के उपयोग करने एवं निजी बातचीत रिकार्ड करने को लेकर खबरिया चैनल की आलोचना की। (भाषा)
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