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Friday, 09 November 2012 15:54 |
नयी दिल्ली (एजेंसी) उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले से संबंधित लंबित सभी याचिकाओं की कार्यवाही पर आज रोक लगा दी।
न्यायालय ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो के अनुरोध पर यह रोक लगायी। न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी और न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन की खंडपीठ ने कहा, ‘‘दिल्ली उच्च न्ययालय में लंबित सारी कार्यवाही पर रोक रहेगी।’’ न्यायालय ने इसके साथ ही विभिन्न पक्षों को नोटिस जारी किया। इन सभी को छह सप्ताह के भीतर जांच एजेन्सी के आवेदन का जवाब देना है। जांच ब्यूरो ने अपनी अर्जी में उच्चतम नयायालय के 11 अप्रैल, 2011 के आदेश का हवाला दिया था। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि इस मामले से संबंधित किसी भी अर्जी पर शीर्ष अदालत के अलावा कोई भी अदालत विचार नहीं करेगी। न्यायालय को सूचित किया गया था कि 2जी स्पेक्ट्रम मामले में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद से दिल्ली उच्च न्यायालय में 20 याचिकाएं या आवेदन लंबित हैं। शीर्ष अदालत ने 2जी स्पेक्ट्रम प्रकरण से संबंधित मामले की आठ नवंबर को सुनवाई के दौरान इस बात पर अप्रसन्नता व्यक्त की थी कि उसके आदेश के बावजूद दिल्ली उच्च न्यायालय इससे जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहा है।
न्यायाधीशों ने कहा था, ‘‘हमारी निषेधाज्ञा के बावजूद दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2जी स्पेक्ट्रम प्रकरण से संबंधित याचिका पर विचार किय। उच्च न्यायालय का इस तरह का आचरण अचरज वाला है।’’ केन्द्रीय जांच ब्यूरो की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के के वेणुगोपाल ने न्यायालय से अनुरोध किया था कि वह ऐसी कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश दे सकता है। इस पर न्यायाधीशों ने कहा था कि जांच एजेन्सी को आवेदन दायर करना होगा ताकि इस संबंध स्पष्ट आदेश दिया जा सके। न्यायाधीशों ने कहा था कि वे स्पष्ट कर देंगे कि इस मामले से संबंधित किसी भी याचिका पर कोई भी अदालत विचार नहीं करेगी। इससे पहले, इस्सर समूह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने निषेधाज्ञा के बारे में स्पष्टीकरण देने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि प्रभावित पक्षों को उपलब्ध कानूनी अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता है और उच्च न्यायालय की शरण में जाना इसमे से ही एक अधिकार है। रोहतगी ने कहा था कि संसद ही कानून मेंं संशोधन कर सकती है और कानून में प्रदत्त अधिकारों से किसी को वंचित नहीं किया जा सकता है।
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Last Updated on Friday, 09 November 2012 18:08 |