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Friday, 09 November 2012 09:35 |
नई दिल्ली । विश्वविद्यालय की मौजूदा प्रणाली को भारतीय कंपनियों व उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त बताते हुए मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री ने कहा कि देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व शोध संस्थान स्थापित करने और शिक्षा में निजी क्षेत्र के निवेश की जरूरत है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वैश्विक उच्च शिक्षा शिखर सम्मेलन के दौरान थरूर ने कहा कि वर्तमान विश्वविद्यालय व शिक्षा से ‘दक्ष’ स्नातक नहीं मिल पा रहे हैं जिससे कंपनियों को प्रशिक्षण के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रवेश करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा-अतीत में भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति समय के मुताबिक नहीं रही। 12वीं पंचयवर्षीय योजना के दृष्टिपत्र में शिक्षा में कौशल उन्नयन की जरूरत पर जोर दिया गया है। निजी क्षेत्र की ओर से गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने के मामले सामने आए हैं। लेकिन मुनाफा कमाने के लिए मैनेजमेंंट और इंजीनियरिंग कालेज काफी संख्या में खोले जा रहे हैं। ऐसे चलन पर लगाम लगाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में आमूलचूल सुधार से जुड़े कई विधेयक संसद में लंबित हैं और उनका मंत्रालय इसे संसद के आगामी सत्र में पारित कराने का प्रयास करेगा। बड़ी समस्या यह है कि हमारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति समय के मुताबिक नहीं है। पश्चिम एशिया और चीन विदेशी विश्वविद्यालयों को लुभाने के लिए बहुत कुछ कर रहे हैं ताकि वे उनके देशों में अपने परिसर स्थापित करें जबकि भारत ने हाल के सालों में ही कई अकादमिक निवेदनों को खारिज कर दिया। मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री ने कहा कि अगर देश में ही अच्छे उच्च शिक्षा संस्थान स्थापित हों तो कई भारतीय छात्रों को अध्ययन के लिए विदेश जाने
की जरूरत नहीं होगी। हम सुधार के हमारे एजंडे को फिर से पटरी पर लाने के लिए काम करेंगे। थरूर ने कहा कि विभिन्न विश्वविद्यालयों, आईआईटी और अन्य प्रौद्योगिकी संस्थानों में विज्ञान जैसे विषयों में शोध के लिए केंद्र स्थापित करने और नवोन्मेषी केंद्र जैसे 50 केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है। अगर इनकी स्थापना हो जाती है तो हमारे देश में शोध का माहौल ही बदल जाएगा। उन्होंने शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय मिशन की स्थापना करने, नारायणमूर्ति और काकोदकर समिति की सिफारिशों के साथ शोध के क्षेत्र में खर्च दो फीसद बढ़ाए जाने की वकालत की। उन्होंने कहा-रोजगार के पर्याप्त अवसरों के अभाव में देश में शिक्षित बेरोजगारों की संख्या बढ़ रही है। हमें अधिक और उन्नत शैक्षिक संभावनाओं के माध्यम से उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर देने चाहिए। मेरा संदेश है-समय आ गया है जब शिक्षा के हजारों फूलों को खिलने दें। उन्होंने कहा कि भारत में दुनिया भर में सबसे बड़ा उच्च शिक्षा संस्थान नेटवर्क है और छात्रों की भर्ती के मामले में हमारा स्थान दूसरा है। इसके बावजूद 2011 में सकल भर्ती अनुपात 18.8 फीसद रहा जो 26 फीसद के वैश्विक औसत से बहुत पीछे है। शिक्षा का उच्च स्तर विकसित करने, कौशल विकास करने और ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है जिसमें न केवल अर्थव्यवस्था का तेजी से विकास हो बल्कि अच्छे रोजगार को भी बढ़ावा मिले। आईआईटी और आईआईएम व अन्य कुछ विश्व स्तरीय संस्थानों का संदर्भ देते हुए मंत्री ने कहा कि औसत संस्थानों के बीच ऐसे भी कुछ संस्थान हैं। थरूर ने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र के तेजी से विस्तार के कारण देश में शिक्षकों की भारी कमी सामने आई है।
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