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प्रधानमंत्री के नाम PDF Print E-mail
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Friday, 26 August 2011 14:31

अण्णा हजारे के अनशन को दस दिन हो चले। लेकिन आपकी सरकार और कांग्रेस जन लोकपाल बिल को कमजोर करने और अण्णा हजारे का आंदोलन नाकाम करने के लिए संदेहास्पद भूमिका अदा कर रही हैं। यह कांग्रेस की संस्कृति नहीं है।
आजादी के पूर्व उस दौर को याद करें जब महात्मा गांधी ने सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, अबुल कलाम आजाद, सरोजनी नायडू, राजाजी, मोतीलाल नेहरू, बिधान चंद्र राय जैसे कई अन्य नेताओं की रहनुमाई में कांग्रेस को खड़ा किया। बाद में कांग्रेस अपने गांधीवादी मार्ग से भटक गई और जन-समस्याओं और भ्रष्टाचार दूर करने की बजाय वह मूकदर्शक बनी रही। आप इन हालात से वाकिफ हैं, पर असमर्थ हैं और अब पूरा देश भ्रष्टाचार के खिलाफ अण्णा के आंदोलन से जाग उठा है। आपके  नेतृत्व मेंयह सरकार असहाय क्यों है?

समस्या को सुलझाने के प्रति आपका यह असहनीय मौन और निष्क्रियता भारत और कांग्रेस का नाम बदनाम कर रही है। मेरा परिवार शुरू से कांग्रेस के प्रति समर्पित रहा है। मेरे दादा जी के भाई पंडित मुनीश्वर दत्त उपाध्याय ने पंडित नेहरू के साथ काम किया, वे पचास के दशक में उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष थे। मेरे पूरे परिवार का आपसे अनुरोध


है कि कांग्रेस और इस देश को बचाने के लिए कदम उठाएं।

इस समय हजारों लोग, खासकर युवा पीढ़ी अण्णा और जन लोकपाल बिल के समर्थन में हैं। इस वक्त कोई कदम नहीं उठाया गया तो क्या कांगे्रस अगले लोकसभा चुनाव में इनका मुकाबला करेगी। लगता है आप अज्ञानी सलाहकारों के दबाव में हैं जिनका गांधीवादी मूल्यों और राष्ट्रीय गौरव से कोई वास्ता नहीं है जो मौजूदा हालात से निपट सकें।

अचरज है कि इस समय हमारा देश सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है और आप सिर्फ दर्शक बने हुए हैं। जनाक्रोश की अवहेलना कर रहे हैं। आपने लोकपाल बिल और इसकी समय सीमा को लेकर नए सुझाव से संबंधित अखबारों में जो प्रकाशित कराया है, वह गलत है। इसकी समय सीमा चार सितंबर रखी गई है। यह इसलिए किया गया कि जन लोकपाल बिल संसद में तीस अगस्त तक पारित नहीं हो पाए।

आप जैसा ईमानदार और बुद्धिमान प्रधानमंत्री अण्णा को मिल रहे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समर्थन को नजरअंदाज नहीं कर सकता। तब फिर इस तरह की दुर्बलता और हठ का क्या औचित्य है? आपसे अनुरोध है कि जनादेश को मानकर देश, कांग्रेस, गांधीवादी मूल्यों और राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा कीजिए।

’डॉ. स्वदेश भारती, कोलकाता

 
 

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