April 28, 2017

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संवत 2074 के राजा बुध और मंत्री होंगे वृहस्‍पति, क्‍या होगा असर, पढ़‍िए सदगुरु स्वामी आनन्द जी का आकलन

२८ मार्च २०१७ से नव संवत २०७४ का आग़ाज़ होगा, जिसे विरोधकृत नाम से पहचाना जाएगा। इस नवीन संवत्सर के राजा बुधदेव और मंत्री वृहस्पति देव होंगे।

भारत वर्ष की कुंडली में धनेश बुध के घर में व्ययेश मंगल की मौजूदगी से लेनदेन से जुड़े भ्रष्ट आचरण में कोई आमूलचूल परिवर्तन के संकेत नहीं मिल रहे हैं।

२८ मार्च २०१७ से नव संवत २०७४ का आग़ाज़ होगा, जिसे विरोधकृत नाम से पहचाना जाएगा। इस नवीन संवत्सर के राजा बुधदेव और मंत्री वृहस्पति देव होंगे। राजा बुध होने से अपने अपने धर्म के प्रति आस्था गहरी होगी। उत्तम या अधिक वर्षा और मांगलिक कार्यों का योग बनेगा। तकनीक से लाभ उठाने के प्रयास में वृद्धि होगी। मंत्री वृहस्पति होने से धान्य की तो बहुलता होगी, पर रहनुमाओं की आपसी खींचतान से समाज में अलग तरह की बेचैनी तारी रहेगी। राजा की छवि निखरने का प्रयास वास्तविक नहीं, कृत्रिम नज़र आयेगा। राजा और उनके मन्त्रियों में परस्पर गुप्त मतभेद जन्म लेंगे। कई मामलों में शासन, प्रशासन के बयानों में अंतर दिखाई देगा।

– मंत्रीमण्डल में सस्येश पूर्वधान्येश यानि धान्यपति के पद पर सूर्य के विराजने से अपहरण, चोरी और धोखाधड़ी की घटनायें बढ़ेंगी। अपराध बढ़ेगा। देश के पूर्वी भाग में ज़्यादा क्राइम नज़र आएगा। ऑनलाइन फ़्रॉड से इस साल लोग त्रस्त रहेंगे। राष्ट्रों में आपसी खींचतान और सैन्य झड़प का पूरा अंदेशा है। एक दूसरे का सैनिक अभ्यास विरोधियों को उकसायेगा भी और बेचैन भी करेगा। अधिक वर्षा से फ़सल को क्षति पहुँचेगी। धान्य सस्ता होकर मुनाफ़ाख़ोरी से महंगा होगा। पौधों और वृक्षों की संख्या बढ़ेगी।

– पश्चिम धनेश के पद पर शनि देव के विराजने से दीवानी मुक़दमे अधिक दर्ज होंगे। सम्पत्ति विवाद चहुंओर से सर उठायेंगे। बिल्डरों और कारोबारीयों पर मुक़दमें बढ़ेंगे। कुछ भाग जायेंगे, कुछ जेल जायेंगे। धन-धान्य के अभाव का स्पष्ट अनुभव होगा। दुग्ध की कमी होगी। फलस्वरूप दूध और गोरस से बने खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में वृद्धि का योग है। विचित्र तरह के विकार फैलेंगे। लोगों के मन की उदासी और क्रूरता चिंता का विषय होगी। क्लेश और अलगाव बढ़ेगा।

– मेघेश पद पर देव गुरु वृहस्पति के विराजने से उत्तम वर्षा होगी। धान्य ख़ूब पैदा होकर रख रखाव के अभाव में सड़ेंगे। और उसकी पूर्ति आयात के माध्यम से होगी। रसीले पदार्थों की पैदावार बहुत होगी, पर कुछ पैदावार असामयिक बारिश की भेंट चढ़ेंगे तो कुछ कीड़ों का प्रसाद बनेंगे। फिर भी काफ़ी फल आम जन को उपलब्ध होंगे। यज्ञ, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों में वृद्धि होगी। राजाओं, नेताओं और बड़े लोगों को इस बरस प्रभु की याद ज़्यादा सतायेगी। सुधारवादी नीतियां के दूरगामी लाभ आगे शायद अवश्य, पर इस साल तो जनमानस का कचूमर निकल जाएगा।

– मंगल के रसेश होने से शासन, प्रशासन प्रजा के प्रति क्रूर नज़र आयेगा। मुट्ठी भर लोगों के कारण आम जन को पीड़ा झेलनी होगी। रसीले पदार्थ महंगे होंगे। अच्छे उत्पादन के बावजूद बेमौसम या अनियमित बरसात अथवा कीड़ों से रसीली वस्तुओं को क्षति पहुंचेगी। सूर्य के निरसेश होने से सोने के भाव में क्षणिक ही सही, पर सोने के भाव में कुछ वृद्धि की सम्भावना है। पर आभूषण महंगा होने के बाद भी व्यापारी लाभ का भागी नहीं बनेगा। जनता की रुचि जवाहरात में कुछ कम होगी। लोगों के स्वभाव में धैर्य कम होगा, बेचैनी और झुंझलाहट बढ़ेगी।

– बुध के फलेश होने से सीमित धन या संसाधन से अधिक लाभ की प्रवृत्ति या तकनीक का विस्तार होगा। व्यक्तिगत व पारिवारिक सम्बन्धों में मधुरता बढ़ेगी। पुष्पों का उत्पादन और निर्यात में वृद्धि की स्थिति बनेगी। धनेश पद पर सूर्य की उपस्थिति से ख़स्ता बाज़ार में भी नये धनी मोटा माल कमायेंगे। पशुओं के कारोबारी लाभ में होंगे। दुर्गेश पद पर वृहस्पति के विराजने से नीति के रूप में नवीन योजनाओं की अधिकता होगी। शहर से लेकर तक ग्राम तक के लोगों के लिए नवीन योजनाओं का सूत्रपात होगा। इनका लाभ इस बरस प्रत्यक्ष से ज़्यादा दस्तावेज़ों में बढ़-चढ़ कर नज़र आयेगा।

नव संवत्सर २०७४ प्राकृतिक और ग़ैर प्राकृतिक झमेलों का होगा। संवत के राजा और मंत्री के आपसी बेमेल संबंधों के कारण यह वर्ष मिली जुली घटनाओं का साक्षी बनेगा। किसी मंत्री या मुख्यमंत्री को लेकर कोई विवाद या अजीब ख़बर आएगी। विरोधी ध्रुविकरण का प्रयास करेंगे, पर इस संवत्सर में उन्हें सफलता मुँह चिढ़ाएगी।

इस संवत में आगजनी, वायु और सड़क दुर्घटना, संघर्ष, ख़ून ख़राबे और अपहरण जैसी कई घटनायें विचलित करेंगी। असंगठित अपराध में कुछ वृद्धि होगी। कर्मेश शनि के कारण न्यायपालिका धारदार नज़र आयेगी और सक्रीय भूमिका निभाएगी। शत्रु शनि से दृष्ट कम वर्षा और बाद में सैलाब जैसी बारिश बेचैन कर देगी। इस साल महामारी और ज़हरीले जीवों से कष्ट होगा। भाद्रपद से आश्विन मास के मध्य किसी विशिष्ट और ख्याति प्राप्त शख़्सियत, अभिनेता या राजनेता की क्षति, अपमान या उससे जुड़ी किसी बुरी ख़बर से लोग अवाक् रह जायेंगे। विश्व और राष्ट्र में आतंक की कुछ विचित्र घटनायें विक्षुब्ध करेंगी, लेकिन इनमें पिछले दो वर्षों की अपेक्षा बेहद मामूली ही सही, पर कमी का भी अहसास भी होगा। नीच के बुध के पराक्रमेश होने से सरहद पर बेचैनी और झड़प नज़र आयेगी, वहीं मंगल के मार्केश होने से कुछ जनहानि सम्भव है।

द्रव्येश शुक्र उच्च का होने से अंतर्रष्ट्रीय सम्बंध मधुर होने से ग्लोबल कारोबार में प्रगति होगी। पॉवर और एनर्जी के क्षेत्र में अपार संभावना पैदा होगी। इस क्षेत्र में इस संवत्सर से लेकर अगले कई वर्षों तक तेज़ी का योग है। शेयर बाज़ार जनवरी के बाद नई करवट लेगा। इंडेक्स में शायद थोड़ा ही सुधार हो, पर कुछ क्षेत्रो के कुछ शेयरों में अगले वर्ष और कुछ वर्षों में कई गुने की भारी तेज़ी दर्ज होगी। शेयर के कारोबा में एनर्जी, शुगर, सिमेंट, स्टील इत्यादि क्षेत्रों में अपार सम्भावना नज़र आ रही है।मई के अंत से बाज़ार सुस्त हो जायेगा। शिक्षा और उससे सम्बंधित कारोबार में कुछ चुनौतियां दिखाई दे रही है। पर इसका असर इस संवत से ज़्यादा आगे के संवत्सरों में ज़्यादा दृष्टिगोचर होगा।

प्रॉपर्टी में मामूली गहमागहमी दिखाई तो देगी, पर २१ मई को शनि के वक्री होने से सारी आस पानी के बुलबुले की तरह ध्वस्त हो जायेगी। १८ नवम्बर, २०१७ को जब शनिदेव धनु में लौटेंगे, संपत्ति की स्थिति बेहद मामूली रूप से सुधरेगी। पर जनता की रुचि तब भी कुछ ख़ास नहीं जगेगी। संपत्ति कारोबार में नये तरह का ठहराव दृष्टिगोचर होगा। इस संवत्सर में कोई ख़बर जनता के होंठों की मुस्कान का सबब बनेगी। भारत वर्ष की कुंडली में धनेश बुध के घर में व्ययेश मंगल की मौजूदगी से लेनदेन से जुड़े भ्रष्ट आचरण में कोई आमूलचूल परिवर्तन के संकेत नहीं मिल रहे हैं। अप्रेल मास में टेक्सटाइल्स, मेवे और रसीले फलों में तेज़ी, मई में दूध, सब्ज़ी, गेंहूं, सरसों, तूअर और चना में बढ़ोत्तरी, जून में शक्कर और रसीले पदार्थों के भावों में वृद्धि, लाल पदार्थों में गिरावट, जुलाई में सिमेंट, और खाद्य पदार्थों के भावों में कुछ गिरावट, फलों, पेट्रोल-डीज़ल, मूंग, तूअर और चना में तेज़ी, अगस्त में टेक्सटाइल्स, क़ीमती धातुओं और सब्ज़ियों के भावों में वृद्धि, सितम्बर में खाद्य पदार्थ सस्ते, तेल, कपास, रेशमी और ऊनी वस्त्र, क़ीमती धातु, मेवे और मसाले महंगे होंगे। अक्टूबर में फल, शक्कर, चावल, दाल और चने में तेज़ी, नवम्बर में लाल रंग की वस्तुयें,लकड़ी, बिल्डिंग मटीरियल महंगे और शक्कर, सब्ज़ी, सूती कपड़े के भावों में कमी, दिसम्बर में क़ीमती धातुओं, खाद्य पदार्थ, चावल, शक्कर, फल और सब्ज़ियों के भाव में तेज़ी का योग है।

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First Published on March 27, 2017 4:33 pm

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