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भैरव अष्टमी आज, पूजा के दौरान इन बातों का रखें खास ध्यान

इस दिन भगवान शिव जी ने कालभैरव के रूप में अवतार लिया था।

काल भैरव जयंती को महाकाल भैरवअष्टमी और कालाभैरव अष्टमी के नाम से जाना जाता है।

मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालभैरव अष्टमी मनाई जाती है। काल भैरव को रात के देवता माना जाता है। इस साल दो दिन 10 नवंबर और 11 नवंबर को कालभैरव अष्टमी है। इस दिन भगवान शिव जी ने कालभैरव के रूप में अवतार लिया था। कालभैरव भगवान शिव का अत्यंत ही रौद्र, भयाक्रांत, वीभत्स, विकराल प्रचंड स्वरूप है। भैरवजी को काशी का कोतवाल भी कहा जाता है। इसके पूजा करने से सभी विवाद, सभी परेशानियां अपने आप ही शांत होने लगती हैं

इस तरह करें पूजा –

1. शाम के समय भैरव पूजा करें।
2. इनके सामने सरसों के तेल का एक बड़ा दीपक जलाएं।
3. दूध और उड़द से बने पकवान अर्पित करें।
4. भैरव जी को शरबत या सिरका अर्पित करें।
5. तामसिक पूजा करने पर भैरव जी को मदिरा भी अर्पित की जाती है
6. प्रसाद चढ़ाएं के बाद भैरव मंत्रों का जाप करें।

भैरव की उपासना से वह प्रसन्न होकर आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद निभाते हैं। कहा जाता है कि भैरव नाराज हो जाएं तो अनिष्ट हो सकता है। भैरव पूजा को दौरान इन बातों का ध्यान रखें-

1. गृहस्थ लोगों को भैरव देव की तामसिक पूजा करनी चाहिए।
2. इस दिन बटुक भैरव की पूजा करनी चाहिए। यह सौम्य पूजा मानी जाती है।
3. भैरव पूजा किसी के बुरे के लिए ना करें।
4. भैरव पूजा किसी योग्य गुरु के संरक्षण के न करें।

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First Published on November 11, 2017 11:03 am

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