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दूर कर लीजिए ये गलतफहमी: माहवारी में महिलाओं के दिमाग पर नहीं पड़ता कोई असर

ऐसा माना जाता है कि माहवारी के दौरान महिलाओं के मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे उनके सोचने समझने की क्षमता प्रभावित होती है।
माहवारी के दौरान अगर महिलाओं की मानसिक स्थिति पर कोई फर्क पड़ता भी है तो उसका कारण माहवारी के दौरान होने वाला दर्द हो सकता है

ऐसा माना जाता है कि माहवारी के दौरान महिलाओं के मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे उनके सोचने समझने की क्षमता प्रभावित होती है। लेकिन हाल ही में हुए एक सर्वे में इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया गया। वैज्ञानिकों की एक टीम ने 88 महिलाओं पर परीक्षण करके यह बताया कि माहवारी के दौरान होने वाले हार्मोनल परिवर्तन का उनके सोचने समझने की क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इस शोध से जुड़े ज्यूरिख के यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के प्रोफेसर ब्रिगिटे लीनर्स ने बताया कि रिप्रोडक्टिव मेडिसिंस स्पेशलिस्ट और एक साइकोथेरेपिस्ट होने के नाते मैं कई ऐसी महिलाओं से मिल चुका हूं जिनको ऐसा लगता है कि मासिक चक्र के दौरान उनकी सेहत और सोचने-समझने की क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ता है।

लीनर्स का कहना है कि माहवारी के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों का संबंध कहीं से भी महिलाओं की सोचने-समझने की शक्ति से नहीं होता है। शोधकर्ताओं ने इस बाबत 88 महिलाओं के एक समूह का अध्ययन करते हुए उनकी स्मरण क्षमता और सोचने-समझने की क्षमता का परीक्षण किया था। इसके बाद उनमें से करीब 68 महिलाओं का परीक्षण उनके दूसरे मासिक चक्र के दौरान भी किया गया। फ्रंटियर्स इन बिहैवियरल न्यूरोसाइंस नाम की एक पत्रिका में लिखते हुए वह कहते हैं कि इस शोध के परिणाम यह बताते हैं कि मासिक चक्र के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव महिलाओं के मानसिक क्षमता पर कोई असर नहीं डालते।

माहवारी के दौरान अगर महिलाओं की मानसिक स्थिति पर कोई फर्क पड़ता भी है तो उसका कारण माहवारी के दौरान होने वाला दर्द हो सकता है। शोधकर्ताओं ने छोटे सैंपल साइज वाले अन्य कई अध्ययनों की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के अध्ययन के लिए 100 से अधिक परीक्षण बेहतर होते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि हार्मोंस अलग-अलग समय पर भिन्न-भिन्न हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हमारा मूल्यांकन केवल तीन तरह के संज्ञानात्मक कार्यों पर था जो हर तरह की मानसिक स्थिति को कवर नहीं करता। ज्ञात हो कि इस शोध में महिलाओं की स्मरण क्षमता, उनके ध्यान और उनकी सोचने-समझने की शक्ति पर परीक्षण किया गया था।

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