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दिल की बीमारी से पीड़ित रोजे में क्या करें और क्या नहीं

लंबे अरसे से दिल की बीमारी से जूझ रहे वे लोग जिन का हृदय सही से काम नहीं करता है खासतौर पर जिन्हें तनाव में सांस लेने में तकलीफ होती है उन्हें चिकित्सकीय आधार पर रोजा नहीं रखना चाहिए।
Author नई दिल्ली | June 5, 2016 15:39 pm
रमजान में रोजा के दौरान जामा मस्ज़िद की तस्वीर। (फाइल फोटो)

दिल की बीमारी से ग्रस्त लोग रोजे में क्या करें और क्या नहीं करें इस बारे में भारत के प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञों ने रमजान का महीना शुरू होने से पहले उन्हें सलाह दी है। उन्होंने अनियंत्रित रक्तचाप के मरीजों को भी खासतौर पर आगाह किया है। नई दिल्ली के फोरट्सि एस्कॉर्ट हार्ट इंस्ट्टिीयूट के कार्यकारी निदेशक और कार्डियोलॉजी के डीन डॉ उपेंद्र कौल ने कहा है कि दिल के रोगियों के लिए खाने और पानी के बिना सूर्य उदय से लेकर अस्त तक का रोजा रखना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने उन्हें निम्नलिखत का अनुसरण करने की सलाह दी:

उच्च रक्तचाप : उच्च रक्तचाप के ऐसे मरीज जो अक्सर कई दवाइयां लेते हैं उन्हें सलाह दी गई है कि वह पवित्र महीना शुरू होने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि उनका रक्तचाप काफी अच्छी तरह से नियंत्रित रहे। ऐसी कई गोलियों का मिश्रण है जिन्हें अहले सुबह में रोजा शुरू होने से पहले और इफ्तार (रोजा तोड़ने) के वक्त लिया जा सकता है। जिन मरीजों का रक्तचाप अनियंत्रित रहता है उन्हें रोजा रखने से सख्ती से परहेज करना चाहिए।

दिल की बीमारियां : लंबे अरसे से दिल की बीमारी से जूझ रहे वे लोग जिन का हृदय सही से काम नहीं करता है खासतौर पर जिन्हें तनाव में सांस लेने में तकलीफ होती है उन्हें चिकित्सकीय आधार पर रोजा नहीं रखना चाहिए। बहरहाल, ऐसे रोगी जो अच्छी तरह से नियंत्रित और लक्षण मुक्त हैं वे एहतियाती उपायों के साथ रमजान में रोजा रख सकते हैं। उन्हें इफ्तार के वक्त ज्यादा खाने से बचना चाहिए और सुबह तक थोड़ा-थोड़ा कुछ कुछ खाते रहना चाहिए। बीमारों को सुबह की बजाय शाम में मूत्रालय जाना चाहिए ताकि शरीर में उचित जलयोजन बरकरार रह सके।

एनजाइना और ओल्ड मायोकार्डियल इंफर्क्शन : एनजाइना के रोगी या सीने में दर्द के मरीज और जिन्हें दिल का दौरा पड़ चुका है और वे सामान्य गतिविधियां करने में सक्षम है वे रोजा रख सकते हैं लेकिन उन्हें रमजान में अपनी शरीरिक गतिविधियों को घटना चाहिए। जिन लोगों को हाल में दिल का दौरा पड़ा है उन्हें सख्त चिकित्सकीय आधार पर रोजा रखने से परहेज करना चाहिए।

एंजयोप्लास्टी (स्टेंटिंग) या बाइपास सर्जरी करा चुके मरीज: जिन रोगियों की एंजयोप्लास्टी या बाइपास सर्जरी कराए एक साल से ज्यादा हो गया है और वे रोजाना की गतिविधियां कर लेते हैं, वे जब तक दवाइयां लेते है तब तक रोजा रख सकते हैं। मेहनत वाली शरीरिक गतिविधियां करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे निर्जलीकरण हो सकता है जिससे स्टेंट में रुकावट हो सकती है।

रक्त का थक्का बनने से रोकने की दवाइयों पर निर्भर : जो लोग खून पतला करने वाली दवाइयां लेते हैं उन्हें सावधान रहने की जरूरत है। अगर वे अच्छा कर रहे हैं और इन दवाइयों पर लंबे अरसे हैं और स्थिर अंतरराष्ट्रीय सामान्यकरण अनुपात (आईएनआर) की 2-3 पर है वे रोजा रख सकते हैं। आईएनआर रक्त के थक्के की प्रवृति को तय करता है।

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