June 29, 2017

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2017: योग करने के क्या हैं फायदे, जानिए किस आसन से क्या लाभ होगा

International Yoga Day 2017: योग करने से हम मानसिक और शारीरिक रुप से स्वस्थ रहते हैं। प्रात: काल योग करने से दिनभर की चिंताओं से मुक्ति मिलती है।

International Yoga Day 2017: पुलिस कर्मचारी योग की ट्रेनिंग लेते हुए। (फोटो-पीटीआई)

भारत में योग का अस्तित्व प्राचीन काल से है। योग शरीर को अलग-अलग मुद्राओं में मोडऩा या असंभव लगने वाली क्रियाएं करना ही नहीं है। शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाना पूर्ण योग होता है। योग से शरीर, मन और मस्तिष्क को नई ऊर्जा मिलती है। योग करने से हम मानसिक और शारीरिक रुप से स्वस्थ रहते हैं। प्रात: काल योग करने से दिनभर की चिंताओं से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा योग के जरिए हमें विभिन्न प्रकार की बीमारियों से लड़ने में मदद मिलती है।

योग से ब्लड प्रेशर नॉर्मल रहता है। मानसिक तनाव कम होता है। मोटापे और कोलेस्ट्रोल पर भी कंट्रोल होता है। योग करने से व्यक्ति का रक्तसंचार तेज होता है जिससे सौंदर्य में भी वृद्धि होती है। योग का प्रभाव तन पर ही नहीं बल्कि मन पर भी होता है। योग करने से मन शांत रहता है। योग के जादुई फायदों के कारण ही पूरा संसार अब योग की ओर बढ़ रहा है। हालांकि कई बीमारियों से ग्रसित लोगों को योग के दौरान सावधानी बरतनी चाहिए।

आज हम इसी क्रम में आपको बताने जा रहे हैं कि योग के मुख्य कितने प्रकार हैं, और उसके क्या फायदे हैं।

10 मुख्य योग आसन-

1 स्वस्तिकासन-
कैसे करें- स्वच्छ कम्बल या कपडे पर पैर फैलाकर बैठें। इसके बाद बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाहिने जंघा और पिंडली के बीच इस प्रकार स्थापित करें की बाएं पैर का तल छिप जाये उसके बाद दाहिने पैर के पंजे और तल को बाएं पैर के नीचे से जांघ और पिंडली के मध्य स्थापित करने से स्वस्तिकासन बन जाता है। सीधी कर श्वास खींचकर यथाशक्ति रोकें। इसी प्रक्रिया को पैर बदलकर भी करें।

लाभ- पैरों का दर्द, पसीना आना दूर होता है।

2 गोमुखासन
कैसे करें- दोनों पैर सामने फैलाकर बैठें। बाएं पैर को मोड़कर एड़ी को दाएं नितम्ब के पास रखें।
दायें पैर को मोड़कर बाएं पैर के ऊपर इस प्रकार रखें की दोनों घुटने एक दूसरे के ऊपर हो जाएं। फिर दायें हाथ को ऊपर उठाकर पीठ की ओर मुड़िए तथा बाएं हाथ को पीठ के पीछे नीचे से लाकर दायें हाथ को पकड़िए।

लाभ- यकृत, गुर्दे एवं वक्ष स्थल को बल देता है। संधिवात, गाठिया को दूर करता है।

3 त्रिकोणासन
कैसे करें- सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं उसके बाद अपने पैरों को एक मीटर की दूरी तक फैलाएं और फिर अंदर की ओर सांस भरें। अपनी दोनों बाजुओं को कंधे की सीध में ले जाएं फिर कमर से आगे की ओर झुकें। इसी बीच सांस छोड़ें।

लाभ- यदि आप अपने पेट की चर्बी को कम करना चाहते हैं तो आप त्रिकोण आसन करके ऐसा कर सकते हैं।

4 धनुरासन
कैसे करें– सबसे पहले एक साफ और बराबर जगह पर पेट के बल लेट जाएं और अपनी हथेलियों को जमीन पर रखकर अपने मुंह को जमीन से ऊपर की ओर उठाएं। इसके बाद अब अपने दोनों हाथों को जमीन से हटा लीजिये। अब आपका शरीर आपके पेट के सहारे जमीन पर टिका हैं। अब दोनों पैरों को भी जमीन से उठा लीजिये और अपने दोनों हाथों से अपने पैरों को पकड़ने का प्रयास करें। जब आप इस क्रिया को करें तो अपने दोनों घुटनों को साथ में जोड़ने की कोशिश करें।

लाभ – अगर आप भी रीढ़ की हड्डी को लचीला, मजबूत और शरीर को सुडौल बनाना चाहते हैं तो आप धनुरासन की करको ऐसा कर सकते हैं।

5 हलासन
कैसे करें- किसी साफ व बराबर जगह पर कपड़ा बिछा कर पीठ के बल लेट जाएं और दोनों पैर एक दूसरे से मिले हुए हों और दोनों हाथों की हथेलियां जमीन पर और कमर के पास लगी हुई हों। मुंह ऊपर आसमान की तरफ और आखें बंद हो। अब धीरे-धीरे दोनों पैरों को ऊपर की ओर उठाएं। ऐसा करते समय पेट को सिकोड़ें और सांस को अंदर लें। दोनों पैरों को सिर के पीछे लगाने कि कोशिश करें। पीठ और कमर को पैरों के साथ पीछे की तरफ मोड़ने के लिए हाथों का सहारा लें। अब धीरे-धीरे अपनी क्षमता के अनुसार ही पैरों को मोंड़ें और थोड़ा रूकने का प्रयास करें। घुटनें मुड़ें नहीं चाहिए इस बात का ध्यान रखें। अब वापस अपनी पहली अवस्था में आ जाएं।

लाभ – हलासन की मदद से आप सिरदर्द नींद न आने की समस्या से निजात पा सकते हैं। इस आसन को करने से मधुमेह के रोगियों को फायदा होता है।।

6 अर्द्धमत्स्येन्द्रासन
कैसे करें– दोनों पैर सामने फैलाकर बैठें. बाएं पैर को मोड़कर एडी को नितम्ब के पास लगाएं। बाएं पैर को दायें पैर के घुटने के पास बाहर की ओ़र भूमि पर रखें। बाएं हाथ को दायें घुटने के समीप बाहर की ओ़र सीधा रखते हुए दायें पैर के पंजे को पकडें। दायें हाथ को पीठ के पीछे से घुमाकर पीछे की ओर देखें। इसी प्रकार दूसरी ओर से इस आसन को करें।

लाभ – मधुमेह (diabetes) एवं कमरदर्द में लाभकारी।

7 योगमुद्रासन
कैसे करें- बाएं पैर को उठाकर दायीं जांघ पर इस प्रकार लगाइए की बाएं पैर की एडी नाभि केनीचे आये। दायें पैर को उठाकर इस तरह लाइए की बाएं पैर की एडी के साथ नाभि के नीचे मिल जाए। दोनों हाथ पीछे ले जाकर बाएं हाथ की कलाई को दाहिने हाथ से पकडें। फिर श्वास छोड़ते हुए। सामने की ओर झुकते हुए नाक को जमीन से लगाने का प्रयास करें।

लाभ – चेहरा सुन्दर, स्वभाव विनम्र व मन एकाग्र होता है।

8 उदाराकर्षण या शंखासन
कैसे करें- हाथों को घुटनों पर रखते हुए पंजों के बल उकड़ू (कागासन) बैठ जाइए। पैरों में लगभग एक सवा फूट का अंतर होना चाहिए। श्वास अंदर भरते हुए दायें घुटने को बाएं पैर के पंजे के पास टिकाइए तथा बाएं घुटने को दायीं तरफ झुकाइए। गर्दन को बाईं ओर से पीछे की ओर घुमाइए व पीछे देखिये। थोड़े समय रुकने के पश्चात श्वास छोड़ते हुए बीच में आ जाइये।

लाभ – आंत, गुर्दे, अग्नाशय तथा तिल्ली सम्बन्धी सभी रोगों में लाभप्रद है।

9 सर्वांगासन
कैसे करें- दोनों पैरों को धीरे – धीरे उठाकर 90 अंश तक लाएं। बाहों और कोहनियों की सहायता से शरीर के निचले भाग को इतना ऊपर ले जाएं की वह कन्धों पर सीधा खड़ा हो जाए। पीठ को हाथों का सहारा दें .. हाथों के सहारे से पीठ को दबाएं। कंठ से ठुड्ठी लगाकर यथाशक्ति करें। फिर धीरे-धीरे पूर्व अवस्था में पहले पीठ को जमीन से टिकाएं फिर पैरों को भी धीरे-धीरे सीधा करें।

लाभ- मोटापा, दुर्बलता, कद वृद्धि की कमी एवं थकान आदि विकार दूर होते हैं।

10 अनुलोम-विलोम प्राणायाम
कैसे करें- ध्यान के आसान में बैठें। बायीं नासिका से श्वास धीरे-धीरे भीतर खींचे। श्वास यथाशक्ति रोकने (कुम्भक) के पश्चात दायें स्वर से श्वास छोड़ दें। पुनः दायीं नाशिका से श्वास खीचें। यथाशक्ति श्वास रूकने (कुम्भक) के बाद स्वर से श्वास धीरे-धीरे निकाल दें। जिस स्वर से श्वास छोड़ें उसी स्वर से पुनः श्वास लें और यथाशक्ति भीतर रोककर रखें… क्रिया सावधानी पूर्वक करें, जल्दबाजी ने करें।

लाभ- शरीर की सम्पूर्ण नस नाडियां शुद्ध होती हैं। शरीर तेजस्वी एवं फुर्तीला बनता है। भूख बढ़ती है। रक्त शुद्ध होता है।

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First Published on June 20, 2017 10:01 pm

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