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जन्म के समय कम है बच्चे का वजन तो होता है संक्रमण का खतरा, ये उपाय अपनाकर रख सकते हैं सुरक्षित

जन्म के समय यदि नवजात शिशु का वजन दो किलो या फिर उससे भी कम है तो यह उसकी सेहत के लिए सही नहीं है। सामान्य नवजात शिशु का वजन ढाई किलो से लेकर साढ़े तीन किलो तक होता है।
बच्चे का नामकरण

जन्म के समय यदि नवजात शिशु का वजन दो किलो या फिर उससे भी कम है तो यह उसकी सेहत के लिए सही नहीं है। सामान्य नवजात शिशु का वजन ढाई किलो से लेकर साढ़े तीन किलो तक होता है। कम वजन वाले बच्चे को कई तरह की शारीरिक समस्याओं से जूझना पड़ता है। उनके शरीर में वसा की मात्रा काफी कम होती है, और इस वजह से उनके शरीर के तापमान को सामान्य बने रहने में काफी दिक्कत होती है। इसके अलावा जिन नवजातों का वजन सामान्य से कम होता है, जन्म के पहले ही साल में उनके अचानक मृत्यु का खतरा काफी बढ़ जाता है। इनके फेफड़ों का विकास न हो पाने की वजह से इन्हें सांस लेने में भी तकलीफ होती है। ऐसे में इनको संक्रमण के साथ-साथ पेट की समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।

कम वजन के बच्चों में रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी काफी कम होती है, जिसकी वजह से उनमें संक्रमणजनित कई तरह के रोगों से खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में उनकी देखभाल के लिए ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। बच्चे के समुचित विकास के लिए सर्वोत्तम उपाय मां का दूध होता है। 6 महीने तक बच्चे को मां के दूध का सेवन नितांत आवश्यक है। डॉक्टर्स का मानना है कि जब तक बच्चे का वजन सामान्य न हो जाए उन्हें नियमित रूप से हर दो घंटे पर स्तनपान करवाते रहना चाहिए। कम वजन के नवजात शिशुओं में तापमान को नियंत्रित करना कठिन चुनौती है। शरीर के तापमान के नियंत्रित न रहने पर उनमें संक्रमण का खतरा काफी तीव्र होता है।

ऐसे में जरूरी है कि किसी भी तरीके से बच्चे के तापमान को सामान्य तापमान पर लाया जाए। इसके लिए जन्म के बाद नवजात बच्चे को मां के संपर्क में रखना चाहिए। मां की त्वचा को संपर्क से उसका तापमान संतुलित रहता है। बच्चे को गर्म कमरे में रखना चाहिए। इसके अलावा बिना डॉक्टर्स की सलाह के बच्चों को नहलाना नहीं चाहिए और उन्हें बिना कपड़ों के भी नहीं रखना चाहिए। नवजात शिशु और मां दोनों को मौसम के अनुकूल कपड़े पहनना चाहिए। प्री-मेच्योर बच्चे की सेहत दुरुस्त करने के लिए कंगारू केयर तरीका अपनाया जा सकता है। इसमें बच्चे का संपर्क हर समय मां की त्वचा से रहता है, जिसकी वजह से उसके शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है।

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