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कमजोरी व थकान को न्योता दे सकती है कैल्शियम की कमी, महिलाओं में होती है अधिक कैल्शियम की जरूरत

कैल्शियम एक ऐसा पोषक तत्व है, जिसकी जरूरत हर वर्ग और हर उम्र के लोगों को है। हालांकि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को इसकी जरूरत ज्यादा होती है।
Author नई दिल्ली | July 18, 2017 03:05 am
डबल टोंड दूध में टोंड दूध से अधिक विटामिन डी होता है। विटामिन डी से शरीर में अधिक कैल्शियम अवशोषित होने में मदद मिलती है।

कैल्शियम एक ऐसा पोषक तत्व है, जिसकी जरूरत हर वर्ग और हर उम्र के लोगों को है। हालांकि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को इसकी जरूरत ज्यादा होती है। कम उम्र की लड़कियों में कैल्शियम की काफी कमी देखी जा रही है, जिससे युवावस्था में स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं एक ताजा अध्ययन के अनुसार, भारत के शहरी व ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों की महिलाओं में कैल्शियम की कमी एक आम समस्या बनती जा रही है। यह भागदौड़ भरी जीवन शैली और खानपान की बदलती आदतों के चलते हो रहा है। विशेष रूप से शहरी महिलाओं में पिछले कुछ दशकों में भोजन संबंधी आदतों में बड़ा बदलाव आया है। आइएमए के मुताबिक, लोग प्रसंस्कृत और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों पर तेजी से निर्भर होते जा रहे हैं, जिसके फलस्वरूप शरीर को संपूर्ण आहार नहीं मिल पा रहा है।

आंकड़ों के मुताबिक, 14 से 17 साल की उम्र की लगभग 20 फीसद किशोरियों में कैल्शियम की कमी पाई गई है। हमारी हड्डियों का 70 फीसद हिस्सा कैल्शियम फास्फेट से बना होता है। यही कारण है कि कैल्शियम हमारी हड्डियों की अच्छी सेहत के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण पोषक तत्त्व होता है। महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक कैल्शियम की जरूरत होती है क्योंकि वे उम्र के साथ हड्डियों की समस्याओं से अधिक जूझती हैंइंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के अध्यक्ष डॉ केके अग्रवाल व मानद महासचिव डॉ आरएन टंडन ने एक साझा बयान में कहा कि कैल्शियम के अच्छे अवशोषण के लिए हमारे शरीर को विटामिन डी की आवश्यकता होती है। विटामिन डी की कमी वाले लोगों में कैल्शियम की कमी की संभावना अधिक होती है, भले ही वे कैल्शियम का भरपूर सेवन कर रहे हों। इसका कारण यह है कि शरीर आपके भोजन से कैल्शियम को अवशोषित करने में असमर्थ है। विटामिन डी रक्त में कैल्शियम की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है।

विटामिन डी का पर्याप्त सेवन कैल्शियम अवशोषण को बेहतर बनाने के साथ-साथ, हड्डियों के नुकसान को कम करता है। फ्रैक्चर का खतरा कम करता है और आॅस्टियोपोरोसिस रोग होने से रोकता है। कैल्शियम की कमी से कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे- रक्त के थक्के बनना, रक्तचाप और हृदय की धड़कन बढ़ना, बच्चों में धीमा विकास और कमजोरी व थकान। बुजुर्ग महिलाओं की तुलना में युवतियों को कैल्शियम की जरूरत ज्यादा होती है। नौ से 18 साल की लड़कियों को 1300 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है, जबकि 19 से 50 साल की महिलाओं को 1000 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है। पचास साल से अधिक उम्र की महिलाओं को 1200 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है। डॉ अग्रवाल ने बताया कि कई लोग डॉक्टर की सलाह के बिना कभी भी कैल्शियम की खुराक लेने लगते हैं। अगर बताई गई मात्रा में ली जाए तो यह अतिरिक्त कैल्शियम हृदय की सेहत के लिए ठीक है।

 

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