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कान साफ करने की ये तीलियां हर दिन 34 बच्‍चों को पहुंचाती है अस्‍पताल

अभिभावकों को कॉटन बड्स को बच्चों की पहुंच से दूर रखना चाहिए। एक ताजा सर्वे में यह पाया गया है कि वो हर दिन 34 बच्चों को आपातकालीन विभागों में पहुंचा देते हैं।
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है (फोटो सोर्स एएनआई)

अभिभावकों को कॉटन बड्स को बच्चों की पहुंच से दूर रखना चाहिए। एक ताजा सर्वे में यह पाया गया है कि वो हर दिन 34 बच्चों को आपातकालीन विभागों में पहुंचा देते हैं। नेशनवाइड चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल के एक अध्ययन में पाया गया है कि 1990 से लेकर 2010 तक के 21 सालों के दौरान लगभग 2,63,000 18 साल से कम आयु के बच्चों का इलाज यूएस हॉस्पिटल के आपातकालीन विभाग में कॉटन टिप्ड एप्लीकेटर संबंधी कान के चोटों के लिए किया गया जिसकी संख्या लगभग 12500 वार्षिक या लगभग 34 चोट प्रतिदिन है। ओहियो राज्य विश्वविद्यालय वेक्सनर मेडिकल केंद्र के वरिष्ठ लेखक क्रिस जताना कहते हैं कि दो बड़ी गलत धारणाएं हैं जो मैं बतौर ओटोलर्यनोलॉजिस्ट सुनता हूं वो यह है कि कर्ण-छिद्रों को घरेलू तरीकों से साफ किए जाने की आवश्यकता है और कॉटन टिप एप्लीकेटर का इस्तेमाल इसे साफ करने के लिए किया जाना चाहिए,ये दोनों ही धारणाएं गलत हैं।

कर्ण-छिद्र प्रायः स्वयं साफ किए जाते हैं।कॉटन टिप एप्लीकेटर के इस्तेमाल से न सिर्फ खोंट इयर-ड्रम के और नजदीक धकेल दिया जाता है बल्कि कान को बड़ी क्षति का खतरा भी उत्पन्न हो जाता है। अध्ययन में पाया गया कि कानों को यह क्षति ज्यादातर तब पहुंचती है जब कानों की सफाई के लिए कॉटन टिप एप्लायर इस्तेमाल किया जाता है (73 प्रतिशत), जब कॉटन टिप एप्लायर से खेला जाता है (10 प्रतिशत) या जब बच्चों के कान में कॉटन टिप एप्लायर हो और वह गिर जाएं (9 प्रतिशत)। ज्यादातर क्षति तब पहुंचती है जब बच्चे कॉटन टिप एप्लायर का प्रयोग खुद करते हैं या फिर जब माता-पिता (16 प्रतिशत) या फिर कोई रिश्तेदार (6 प्रतिशत) कॉटन टिप एप्लीकेटर का प्रयोग बच्चों के कान साफ करने के लिए प्रयोग करते हैं। प्रत्येक 3 मरीजों में से 2 उम्र में 8 साल से भी छोटे हैं।

0 से 3 साल के मरीजों की संख्या कुल नुकसान का 40 प्रतिशत है। अधिकांशतः सामान्य चोटें फॉरेन बॉडी सेंसेशन (30 प्रतिशत), छिद्रित इयर ड्रम (25 प्रतिशत) और कोमल ऊतकों की चोटें (23 प्रतिशत) होती थीं।फॉरेन बॉडी संसेशन 8 से 17 वर्ष तक के बच्चों के बीच में सबसे सामान्य रोगनिदान था जबकि 8 साल से कम उम्र के बच्चों के बीच में छिद्रित इयर ड्रम ज्यादा सामान्य रोगनिदान था।

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