ताज़ा खबर
 

तुलसी के पत्ते चबाने को हेल्दी नहीं मानते डॉक्टर्स, जानें क्या है वजह, क्या है सही इस्तेमाल

तुलसी यूं तो कई तरह की बीमारियों का इलाज है लेकिन धार्मिक मान्यताएं तुलसी के पत्ते को चबाने की इजाजत नहीं देती हैं।
Tulsi Vivah 2017: विज्ञान तुलसी के पत्ते को चबाने की बजाय निगलने या फिर इसके इस्तेमाल के दूसरे विकल्पों पर ज्यादा जोर देता है।

तुलसी को बेसिल भी कहा जाता है। हिंदू संस्कृति में तुलसी को बेहद पवित्र पौधा माना जाता है। यही कारण है कि सनातन परंपरा को मानने वाले अधिकांश घरों के आंगन में तुलसी का पौधा जरूर लगा होता है। लोग घरों के आंगन में तुलसी लगाकर रोज उसकी पूजा करते हैं तथा जल चढ़ाते हैं, लेकिन तुलसी केवल धार्मिक महत्व का पौधा नहीं है बल्कि इसके कई चिकित्सकीय गुण इसे औषधियों की कतार में भी शामिल करते हैं। यह आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण औषधि है जो कई तरह के रोगों के निदान में प्रयोग में लाई जाती है। आयुर्वेद में तुलसी के पत्ते को सबसे बेहतरीन प्राकृतिक एंटी-बायोटिक माना जाता है। विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि तुलसी में पाया जाने वाला तैल हमारी श्वांस संबंधी तकलीफों का सबसे प्रभावी उपाय है।

तुलसी यूं तो कई तरह की बीमारियों का इलाज है लेकिन धार्मिक मान्यताएं तुलसी के पत्ते को चबाने की इजाजत नहीं देती हैं। हिंदू संस्कृति के लोग तुलसी को भगवान विष्णु की पत्नी के एक अवतार के रूप में पूजते हैं, और इसे एक पवित्र चीज मानते हैं, इसलिए तुलसी के पत्ते को चबाने के लिए तैयार नहीं होते। सिर्फ इतना ही नहीं तुलसी के पत्ते को न चबाने का एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है। विज्ञान तुलसी के पत्ते को चबाने की बजाय निगलने या फिर इसके इस्तेमाल के दूसरे विकल्पों पर ज्यादा जोर देता है।

दरअसल तुलसी के पत्ते में भारी मात्रा में आयरन और मर्करी पाया जाता है। तुलसी के पत्ते को चबाने पर ये तत्व हमारे मुंह में घुल जाते हैं। ये दोनों ही तत्व हमारे दांतों की सेहत के लिए तथा उनकी सुंदरता के लिए नुकसानदेह हैं। तुलसी थोड़ी अमलीय यानी कि एसिडिक नेचर की होती है, इसलिए रोजाना इसका सेवन दांतों की तकलीफों को दावत दे सकता है। हालांकि तुलसी का ताजा रस मुंह के अल्सर के लिए काफी फायदेमंद होता है लेकिन फिर भी तुलसी के पत्ते को चबाने की इजाजत नहीं दी जाती है।

तुलसी के इस्तेमाल का सबसे बेहतर तरीका होता है चाय के साथ इसका सेवन करना। तुलसी के पत्ते का उपयोग कर बनाई गई चाय प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करती है और मुंह के जर्म्स से सुरक्षा दिलाने में सहयोग करती है। इसके अलावा यह चेहरे के मुहांसो से भी छुटकारा दिलाती है। ब्लड शुगर के नियंत्रण में भी तुलसी के पत्ते की चाय अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा तुलसी के पत्ते को पानी के साथ निगलकर या फिर इसका काढ़ा बनाकर सेवन किया जा सकता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.