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सेहत के ल‍िए खतरनाक है फूंक मार कर बर्थडे केक बुझाना

अमेरिकी शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि हम केक पर कैंडल सजाकर कई तरह की बैक्टीरिया को दावत देते हैं।
बर्थडे कैंडल्स को फूंक मारकर बुझाने की परंपरा की शुरुआत के पीछे अलग-अलग मान्यताएं हैं। (File Photo)

जन्मदिन का अवसर हो या शादी की सालगिरह, हम लोग ऐसे मौकों पर केक जरुर काटते हैं। इस बीच हम एक काम और करते हैं, और वो है कैंडल बुझाकर विश मांगना। अगर ऐसे मौकों पर हम केक पर कैंडल नहीं सजाते हैं तो लोगों में वो उत्साह देखने को नहीं मिलता। खास बात ये भी है कि हम भी केक पर कैंडल सजाकर खुश होते हैं। उससे भी ज्यादा खुशी हमें कैंडल बुझाकर मिलती है। लेकिन केक पर कैंडल सजाने को लेकर शोधकर्ताओं का कुछ और ही मानना है। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि हम केक पर कैंडल सजाकर कई तरह की बैक्टीरिया को दावत देते हैं। लेकिन जब हम केक पर रखे जलते हुए कैंडल को फूंक मारकर बुझाते हैं तो बैक्टीरिया और अधिक बढ़ जाता है।

दरअसल, अमेरिका की क्लेमसन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि केक पर लगी कैंडल्स बुझाते समय केक पर थूक फैल जाता है जिसके कारण केक पर 1400 फीसदी बैक्टीरिया बढ़ जाता है। ‘जर्नल ऑफ फूड रिसर्च’ में प्रकाशित इस स्टडी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, ‘बर्थडे कैंडल्स को फूंक मारकर बुझाने की परंपरा की शुरुआत के पीछे अलग-अलग मान्यताएं हैं। कुछ मान्यताएं कहती हैं कि यह परंपरा प्राचीन ग्रीस में शुरू हुई जिसके तहत केक पर जली हुई मोमबत्ती लगाकर हंट की देवी आर्टिमिस के मंदिर ले जाया जाता था, तो वहीं कुछ दूसरी प्राचीन सभ्यताएं मानती हैं कि कैंडल बुझाने के बाद उससे निकलने वाला धुंआ आपकी मन्नत और प्रार्थनाओं को भगवान तक लेकर जाता है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, इंसान के सांस में मौजूद बायोएरोसोल बैक्टीरिया का सोर्स है जो फूंक मारने पर केक की सतह पर फैल जाता है। इंसानों का मुहं बैक्टीरिया से भरा होता है। हालांकि, इनमें से ज्यादातर बैक्टीरिया हानिकारक नहीं होते हैं। लेकिन अगर कोई बीमार व्यक्ति कैंडल्स को बुझा रहा है तो उस केक को खाने से अवॉइड करें।

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