December 10, 2016

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‘समलैंगिक समुदाय को जागरूक करना जरूरी’

एड्स के फैलाव को बढ़ने से रोकने के लिए समलैंगिक समुदाय को अधिक जागरूक बनाने की जरूरत है।

Author इंदौर | December 2, 2016 05:08 am
एचआइवी आौर एड्स ।

देश में फिलहाल एड्स के महज दो प्रतिशत मामले पुरुषों के बीच असुरक्षित यौन संबंधों के चलते सामने आते हैं। जानकारों ने चेताया है कि एड्स के फैलाव को बढ़ने से रोकने के लिए समलैंगिक समुदाय को अधिक जागरूक बनाने की जरूरत है।  इंदौर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के शरीर क्रिया विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर मनोहर भंडारी ने गुरुवार को कहा, ‘यह वैज्ञानिक तौर पर स्थापित तथ्य है कि कंडोम बिना समलैंगिक संंबंध बनाने वाले पुरुषों में एड्स का खतरा कहीं ज्यादा होता है। समाज में समलैंगिक रुझान में इजाफे के चलते एड्स का खतरा भी बढ़ सकता है। लिहाजा खासकर पुरुष समलैंगिकों में एड्स के खिलाफ जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि इस रोग के फैलाव को रोका जा सके।’

उधर, समलैंगिक, उभयलिंगी और किन्नर (एलजीबीटी) समुदाय के अधिकारों के लिए सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता व किन्नर अखाड़े की प्रमुख लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने कहा कि असुरक्षित यौन संबंधों के चलते एड्स के फैलाव को लेकर केवल इस तबके पर उंगली नहीं उठाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमारे देश में एलजीबीटी समुदाय को कई भेदभावों का सामना करना पड़ता है। लेकिन एचआइवी संक्रमण किसी भी लैंगिक रुझान वाले व्यक्तियों से भेदभाव नहीं करता। जो भी व्यक्ति असुरक्षित तरीके से यौन संबंध बनाएगा, उसे एड्स का खतरा होगा। यहां इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह पुरुष है या महिला, समलैंगिक है या उभयलिंगी अथवा किन्नर।’

‘इंडिया एचआइवी एस्टिमेशन 2015 रिपोर्ट’ के मुताबिक देश में 21.17 लाख लोग एड्स के साथ जी रहे हैं। इन मरीजों में करीब 59 प्रतिशत पुरुष हैं। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (एनएसीओ) की रणनीतिक सूचना प्रबंधन प्रणाली (एसआइएमएस) के वर्ष 2015-16 के आंकडेÞ बताते हैं कि देश में विपरीत लिंग वाले व्यक्तियों के असुरक्षित यौन संबंधों के चलते एड्स के 87 प्रतिशत मामले सामने आए जबकि पुरुषों के बीच असुरक्षित सेक्स इस बीमारी के दो प्रतिशत संक्रमण के लिए जिम्मेदार साबित हुआ।

 

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First Published on December 2, 2016 5:08 am

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