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किस वाकये के बाद जीतेंद्र ने दोबारा एक्टिंग करने के बारे में सोचा भी नहीं था

एक्टिंग में आने से पहल जीतेंद्र जेवरात बेचते थे। चूंकि फिल्मों में कलाकारों को...

फिल्में जितनी मजेदार लगती हैं। असल में उतनी होती नहीं हैं। फिल्म-एक्टिंग ये सारी चीजें बेहद पेंचीदा होती हैं। नामी कलाकार तक कई बार इनसे परेशान हो जाते हैं। जंपिंग जैक जीतेंद्र के साथ भी एक बार कुछ ऐसा ही हुआ था। हालात ऐसे हो गए थे कि उन्होंने दोबारा एक्टिंग के बारे में नहीं सोचा था। एक्टिंग में आने से पहल जीतेंद्र जेवरात बेचते थे। चूंकि फिल्मों में कलाकारों को आर्टिफीशियल जेवरात की जरूरत होती थी। तब वह फिल्मों के लिए उनकी सप्लाई करते थे। लेकिन उनकी तमन्ना एक्टर बनने की थी।

यह बात एक बार उन्होंने वी.शांताराम को बताई। उन्होंने भी फिल्म नवरंग में जीतू को छोटा सा किरदार निभाने को दिया। रोल एक बॉडीगार्ड का था। इसके बाद उन्होंने जीतू को एक और मौका दिया। फिल्म थी सहरा पर इस बार एक दिक्कत सामने आई। जीतेंद्र एक डायलॉग में फंस गए। उन्होंने उसे शूट करने में करीब 30 रीटेक लिए। फिर भी वह सीन ठीक नहीं हो सका। शांताराम इस बात पर नाराज हो गए। थक-हार कर उन्होंने गलत सीन को ओके किया। कारण जीतेंद्र के पिता उनके दोस्त थे।

इधर, जीतेंद्र भी अपनी परफॉर्मेंस से संतुष्ट नहीं थे। उन्हें सोचा नहीं था कि शांताराम उन्हें दोबारा कभी बुलाएंगे। मगर हुआ बिल्कुल इसका उल्टा। शांताराम फिल्म बना रहे थे- गीत गाया पत्थरों ने। उसके स्क्रीन टेस्ट के लिए छह लोग बुलाए गए थे। उसमें जीतेंद्र भी थे। उन्हें इस बात का भरोसा भी नहीं था। यहां तक कि उन्होंने दोबारा अभिनय के बारे में सोचा भी नहीं था। वे सेलेक्ट भी हुए और यहीं से फिल्मों का ककहरा सीखा।

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