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जगजीत सिंह के आसपास के कमरों में भी रहना पसंद नहीं करते थे हॉस्टल के लड़के

दरअसल ये उन दिनों की बात है जब जगजीत सिंह जालंधर के डीएवी कॉलेज में पढ़ते थे। उन दिनों टाउनशिप से बाहर होता था और जगजीत सिंह का हॉस्टल कॉलेज के सामने हुआ करता था।
जगजीत सिंह को ‘गजल का किंग’ के नाम से भी जाना जाता है।

‘चिट्ठी ना कोई संदेश कहां तुम चले गए’, ‘होठों से छू लो तुम’, ‘कोई फरियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे’, ‘होश वालों को खबर क्या’ और ऐसी ना जानें कितनी गजलें जगजीत सिंह के नाम है जो आज भी उनके हमारे बीच होने का एहसास कराती है। मशहूर गजल गायक जगजीत सिंह मखमली आवाज के जादूगर थे। जगजीत सिंह को ‘गजल का किंग’ के नाम से भी जाना जाता है। वैसे तो जगजीत सिंह के जीवन से जुड़ी ऐसी बहुत सी बातें है जो शायद की आप जानते होंगे। आज हम आपको जगजीत सिंह के उन दिनों के बारे में बता रहे हैं जब लड़के उनके आसपास वाले कमरों से भी दूर भागते थे।

दरअसल ये उन दिनों की बात है जब जगजीत सिंह जालंधर के डीएवी कॉलेज में पढ़ते थे। उन दिनों टाउनशिप से बाहर होता था और जगजीत सिंह का हॉस्टल कॉलेज के सामने हुआ करता था। हॉस्टल के जिस रूम में जगजीत सिंह रहते थे उस रूम के आसपास वाले रूम्स से बाकी लड़के दूर भागते थे। उन्हें जगजीत के आसपास रहना पसंद नहीं था। इसके पीछे की वजह जगजीत सिंह का रियाज।

बीबीसी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक जगजीत सिंह सुबह पांच बजे उठकर रियाज किया करते थे और इस वजह से बाकी स्टूडेंट परेशान रहते थे। जगजीत सिंह के रूम के आसपास वाले रूम्स में उनके रियाज की आवाज बाकी स्टूडेंट्स की नींद में खलल पैदा करती थी। ना तो वो खुद सोते थे और न बगल वाले लड़कों को सोने देते थे। इसी वजह से कोई नहीं चाहता था कि उनके आसपास का कमरा मिले।

कई भारतीय भाषाओं में अपनी गायिकी के चलते मील का पत्थर साबित हो चुके जगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी 1941 को बीकानेर के श्रीगंगानगर में हुआ था। 10 अक्टूबर 2011 को जगजीत सिंह इस दुनिया को छोड़ कर चले गए थे।

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