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एक्‍टर, राइटर, मिमिक्री आर्टिस्‍ट सईद जाफरी नहीं रहे, भांजी ने फेसबुक पर दी श्रद्धांजलि

उनकी भांजी शाहीन ने फेसबुक पेज लिखा, 'आज जाफरी परिवार में एक युग का अंत हो गया। सईद जाफरी अपने बहन और भाई के पास पहुंच स्‍वर्ग में पहुंच गए हैं।'
सईद जाफरी। (फाइल फोटो)

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता सईद जाफरी का रविवार को निधन हो गया, वह 86 साल के थे। उनकी भांजी शाहीन ने फेसबुक पेज लिखा, ‘आज जाफरी परिवार में एक युग का अंत हो गया। सईद जाफरी अपने बहन और भाई के पास पहुंच स्‍वर्ग में पहुंच गए हैं।’ उनका जन्म 8 जनवरी 1929 को पंजाब के मलेरकोटला में हुआ था। जाफरी ने रिचर्ड एटनबरो की ऑस्कर विनिंग फिल्म ‘गांधी’ के अलावा ‘दिल’ और ‘अजूबा’ जैसी फिल्मों में भी यादगार रोल किए।

जाफरी ने करियर की शुरुआत दिल्ली में थिएटर से की थी। उन्‍होंने 1951 से 1956 तक ‘ऑल इंडिया रेडियो’ में पब्लिसिटी और एडवरटाइजिंग डायरेक्टर के तौर पर काम किया था। वह पहले भारतीय एक्‍टर थे, जिन्हें ‘आर्डर ऑफ ब्रिटिश अम्पायर’ अवॉर्ड मिला था। 100 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले जाफरी को साल 1978 में आई फिल्म ‘शतरंज के खिलाड़ी’ में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। उन्‍होंने 1988-89 से बीच प्रसारित हुई दूरदर्शन की हिट सीरीज ‘तंदूरी नाइट्स’ में भी काम किया था।

सईद जाफरी ने एक्ट्रेस और ट्रैवल राइटर मेहरुनिमा (मधुर) से शादी की थी, लेकिन 1966 में दोनों अलग हो गए थे। इसके बाद 1980 में उन्होंने जेनिफर से शादी की थी। दूसरी शादी के बाद उनका करियर एक बार फिर पटरी पर लौटा। साल 1986 में “राम तेरी गंगा मैली” और 1992 में फिल्म “हिना” के लिए उन्‍हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवॉर्ड मिला।

जाफरी की भांजी शाहीन ने फेसबुक पर उनके बारे में ये बताया- 

सईद जाफरी का कॅरिअर 1950 के दशक में दिल्‍ली में ऑल इंडिया रेडियो शुरू हुआ था। वहां काम करते हुए पं. रविशंकर, खुशवंत सिंह जैसे कलाकारों, लेखकों आदि से उनका मिलना-जुलना होता गया। वहीं उनकी मुलाकात अदाकारा मधुर से हुई, जो 1958 में उनकी पत्‍नी बन गईं। दोनों की तीन बेटियां हुईं। लेकिन आठ साल बाद, 1966 में दोनों का तलाक हो गया। फिर सईद जाफरी ने जेनिफर से शादी की। वह कास्टिंग डायरेक्‍टर हैं। सईद के एजेंट का काम भी वही करती थीं। दिल्‍ली में सईद जाफरी ने यूनिटी थिएटर की शुरुआत की थी। उन्‍होंने विल्‍डे, शॉ, प्रेस्‍ले आदि कई नाटक किए। केवल अंग्रेजी नाटक इसलिए क्‍योंकि उनका कहना था कि अंग्रेजी भाषा उन्‍हें आसान लगती थी। हालांकि, वह हिंदी, उर्दू भी जानते थे।

सईद जाफरी के पिता हामिद हुसैन जाफरी उत्‍तर प्रदेश में मेडिकल अफसर थे। हर तीन-चार साल पर उनका तबादला होता रहता था।

सईद जाफरी को अपनी मां से काफी कुछ सीखने को मिला था। पेंटिंग, स्‍केचिंग और राइटिंग भी इनमें शामिल था। वह हिंदी, उर्दू और अंगेजी में लिखते थे। वह मिमिक्री भी खूब करते थे।

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