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देखिए कैसे हुई राज कुमार राव की फिल्म ट्रैप्ड की शूटिंग, इस तरह फिल्माए गए थे सांसें रोक देने वाले सीन

फिल्म के मेकिंग वीडियो को 25 मार्च को यूट्यूब पर अपलोड किया गया है और इसे कुछ ही घंटों के अंदर सैकड़ों लोगों ने देखा।
Author नई दिल्ली | March 25, 2017 17:53 pm
राजकुमार राव की फिल्म ट्रैप्ड की शूटिंग के बिहाइंड द सीन्स मेकर्स ने यूट्यूब पर अपलोड कर दिए हैं।

राजकुमार राव की फिल्म ट्रैप्ड की शूटिंग के बिहाइंड द सीन्स मेकर्स ने यूट्यूब पर अपलोड कर दिए हैं। इस वीडियो में आप साफ तौर पर देख सकते हैं कि फिल्म देखते वक्त थिएटर में आपको दांतों तले उंगलिया चबाने को मजबूर कर देने वाले सीन्स की शूटिंग किस तरह की गई थी। विक्रमादित्य मोटवानी निर्देशित यह फिल्म एक ऐसे शख्स की कहानी है जो कि एक ऊचीं इमारत की सबसे ऊपर वाली मंजिल पर अपने ही घर के अंदर कैद हो जाता है। इसके बाद वह किस तरह खुद को इतने दिनों तक जिंदा रखता है और कैद से आजाद हो पाता है या नहीं, यही फिल्म की कहानी है।

फिल्म के मेकिंग वीडियो को 25 मार्च को यूट्यूब पर अपलोड किया गया है और इसे कुछ ही घंटों के अंदर सैकड़ों लोगों ने देखा। वीडियो के डिसक्रिप्शन में बताया गया है कि फिल्म को महज 3 हफ्तों के अंदर बहुत कम जगह के अंदर शूट किया गया जो कि अपने आप में एक रिकॉर्ड था… इसके लिए क्रू को बहुत सारी ऊर्जा की जरूरत थी जिसमें से कुछ को यहां दिखाया गया है। बता दें कि यह वीडियो फ से फैंटम नाम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया है।

नेशनल अवॉर्ड विनर एक्टर राजकुमार राव शाहिद और अलीगढ़ जैसी बायोपिक में अपने काम को लेकर पहचाने जाते हैं। उनका कहना है कि वह फिल्म के बारे में यह नहीं सोचते कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पैसा कमाएगी या नहीं। यह सब कंट्रोल से बाहर की होती हैं। उन्होंने कहा, बॉक्स ऑफिस एक ऐसी चीज है जो मेरे कंट्रोल में नहीं है। मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता। तो ऐसे में इस बारे में सोच कर खुश होने या दुखी होने का कोई मतलब नहीं बनता। मेरा काम केवल अपने किरदार को ईमानदारी से निभाना है।

विक्रमादित्य मोटवानी के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म एक सर्वाइवल ड्रामा है। इसमें एक शख्स की कहानी दिखाई जाएगी जो अपने ही घर में कैद हो जाता है और आसमान छूने वाली इस बिल्डिंग से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचता। राजकुमार ने बताया, करीब 18 से 20 दिनों तक उसी जगह पर रहना शारीरिक और दीमागी रूप से थकाने वाला था। यह नर्क की तरह डरावना था। अगर आप दो दिन तक खाना ना खाएं तो फ्रस्ट्रेट होने लगते हैं। कई बार मेरी आंखों के आगे अंधेरी भी हो जाता था। मैं उठता था और चुपचाप बैठ जाता था।

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