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सिने स्टार बनने से पहले जानिए क्या किया करते थे दिलीप कुमार

बात शुरुआती दिनों की है। पिता का कुछ ठीक नहीं चल रहा था। ऐसे में दिलीप साहब पर घर चलाने की जिम्मेदारी आ गई। किसी बात पर वह पिता नाराज हुए...
1944 में आई दिलीप कुमार की पहली फिल्म ‘ज्वार भाटा’ जिसमें दिलीप कुमार की एक्टिंग से ज्यादा उनकी खूबसूरती की तारीफ हुई।

बॉलीवुड में आना आसान नहीं है। न तो यहां एंट्री करना आसां है। और न ही बुलंदियों पर छाना। बॉलीवुड के ट्रैजेडी किंग के साथ भी कुछ ऐसा ही था। जी हां, हम बात कर रहे हैं दिलीप कुमार साहब की। हाल में उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली है। किडनी संबंधी दिक्कत के चलते आठ दिनों तक उनका इलाज चला था।

दिलीप साहब आज क्या हैं और कैसे हैं। इसकी जानकारी हर किसी के पास है, लेकिन वह पहले कहां थे। मने फिल्मों में आने से पहले क्या करते थे, इसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। आपको यकीन नहीं होगा कि दिलीप साहब पहले सैंडविच की दुकान लगाते थे।

बात शुरुआती दिनों की है। पिता का कुछ ठीक नहीं चल रहा था। ऐसे में दिलीप साहब पर घर चलाने की जिम्मेदारी आ गई। किसी बात पर वह पिता नाराज हुए और ताव में घर से भाग गए। मुंबई के बाद नया ठिकाना पुणे था। उन्होंने सोचा था कि यहां कोई उन्हें पहचानता नहीं है, इसलिए कोई भी काम कर के जीवन गुजार लेंगे। इस वाकये का जिक्र उन्होंने अपनी बायोग्राफी में भी किया है।

पुणे पहुंचने पर वह काम तलाशने लगे। इसी बीच एक इरानी रेस्त्रा में पहुंचे। वहां मैनेजर से फारसी में बात की। काम मांगा, तो उसने दूसरी जगह भेज दिया। काम चाहिए था, लिहाजा बताई गई जगह पर पहुंचे। अंग्रेजी अच्छी थी, इसलिए यहां पर एक कैंटीन की ठेकेदारी मिल गई।

वह इसी के साथ एक आर्मी क्लब का काम संभालने लगे। एक दिन अचानक सेना के एक अधिकारी को उनका बनाया हुआ सैंडविच बेहद पसंद आया। फिर क्या था, उन्होंने सैंडविच और फल की दुकान खोल ली। दुकान चलने लगी। हालांकि, ज्यादा दिनों तक उन्होंने यह काम नहीं किया। इसके बाद वह मां के कहने पर मुंबई आ गए थे और काम तलाशने लगे।

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