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Simran Movie Review: यह तो बिंदास है

सिमरन नाम आते ही ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ की काजोल याद आ जाती है जिससे पिता की भूमिका निभानेवाले अमरीश पुरी ने फिल्म में कहा था, ‘जा सिमरन जा, अपनी जिंदगी जी ले।’

सिमरन नाम आते ही ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ की काजोल याद आ जाती है जिससे पिता की भूमिका निभानेवाले अमरीश पुरी ने फिल्म में कहा था, ‘जा सिमरन जा, अपनी जिंदगी जी ले।’ लेकिन हंसल मेहता ने अपनी फिल्म ‘सिमरन’ में जिस प्रफुल्ल पटेल (कंगना रनौत) को पेश किया है, वह अपनी जिंदगी जीने के लिए पिता के आदेश की प्रतीक्षा नहीं करती। अमेरिका के अटलांटा शहर में गुजराती मूल के माता-पिता की संतान प्रफुल्ल तलाशशुदा है और एक बड़े होटल में हाउस कीपिंग विभाग में काम करती है। माता-पिता के साथ रहने के बावजूद वह माता-पिता क्या सोचते हैं इसकी परवाह नहीं करती। उसमें और ज्यादा आजाद ढंग से जीने की चाहत है इसलिए खुद का अपना फ्लैट लेने की कोशिश करती है और यहीं से लफड़ा शुरू होता है।
एक दिन प्रफुल्ल अपनी एक दोस्त के साथ अटलांटा से लॉस वेगास साथ जाती है और वहां जुआ खेलते हुए बहुत सारी रकम हार जाती है। वह फिर कर्ज लेकर दांव लगाती है और फिर हारती है। अब कर्ज की रकम कैसे चुकाए? कर्ज देने वाला शख्स खूंखार है इसलिए प्रफुल्ल भाग नहीं सकती। इसलिए वह बैंक लूटना शुरू करती है। भेस बदल कर। उसे फ्लैट खरीदने के लिए पैसे का इंतजाम भी तो करना है।

एक सुबह जब वह एक बैंक लूटने जा रही होती है तो उसकी मां ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ का आखिरी दृश्य देख रही होती है जिसमें सिमरन वाला संवाद है। इसीलिए प्रफुल्ल भी बैंक लूटते समय अपना नाम सिमरन बना देती हैं। उधर प्रफुल्ल के माता-पिता उसकी दूसरी शादी के लिए अमेरिका में बसे हुए गुजराती लड़के समीर (सोहम शाह) से बात करते हैं। बातचीत आगे बढ़ती है। सिमरन का बिंदास मिजाज समीर को भा जाता है। लेकिन सिमरन क्या उस लड़के से शादी कर पाएगी? या देर सबेर कानून उसे अपनी गिरफ्त में ले लेगा? पुलिस सिमरन को खोज रही होती है।

कंगना रनौत ने जिस प्रफुल्ल के किरदार को निभाया है वह मुख्य रूप एक आजाद खयाल की भी है। वह तलाकशुदा है लेकिन यौन संबंधों को लेकर खुली है। फिर से शादी करने की उसकी कोई तमन्ना नहीं है और जैसा सोहम शाह के साथ एक दृश्य में दिखाया गया है, वह तितलियों की तरह उड़ना चाहती है। पर उड़ने की चाहत रखना और बात है और हकीकत दूसरी बात। यही हकीकत उसे अपराध की दुनिया में ले जाता है जहां उड़ने पर अघोषित पाबंदी है। घर में भी, बाहर भी। भारत में भी, अमेरिका में भी। हंसल मेहता ने मुसलिमों के खिलाफ उभरती मानसकिता की तरफ भी संकेत किया है। एक दृश्य में टीवी एंकर भी शक करते हैं और प्रफुल्ल के पिता भी कि बैंक लूटने वाली औरत मुसलिम हो सकती है। यह फिल्म संदीप कौर नाम की एक पंजाबी मूल की महिला के साथ अमेरिका में हुए सच्चे वाकये पर बनी है।

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