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श्याम बेनेगल की ‘मंथन’ में गुजरात के 5 लाख किसानों ने लगाए थे पैसे

‘श्वेत क्रांति’ के जनक वर्गीज कुरियन ने बेनेगल को सुझाव दिया कि वह अमूल को-ऑपरेटिव सोसाइटी के पांच लाख किसानों से संपर्क करें और उन्हें दो-दो रुपए देने के लिए राजी करें ताकि फिल्म बनाने के लिए जरूरी रकम का इंतजाम हो सके।
Author नई दिल्ली | January 27, 2016 20:11 pm
श्याम बेनेगल की फिल्म मंथन का एक दृश्य।

यदि कोई ये कहे कि कोई सुपरहिट फिल्म किसानों के पैसे से बनी थी, तो क्या आप यकीन करेंगे? शायद नहीं। लेकिन ये जानकर आप चौंक जाएंगे कि 1976 में रिलीज हुई श्याम बेनेगल की सुपरहिट फिल्म ‘मंथन’ गुजरात के किसानों के पैसे से बनी थी। जानेमाने अभिनेता अनु कपूर ने 92.7 बिग एफएम के मशहूर शो ‘सुहाना सफर’ के दौरान यह खुलासा किया। अनु ने बताया कि 1970 के दशक में जानेमाने फिल्म निर्देशक बेनेगल जब अपनी इस खास परियोजना पर काम कर रहे थे तो उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। अमूल को-ऑपरेटिव सोसाइटी पर फिल्म बनाने की ठान चुके बेनेगल ने निर्माताओं से पैसे लगाने की गुहार लगाई, पर बात नहीं बनी।

‘मंथन’ के निर्माण की कहानी बयान करते हुए अनु ने बताया कि इतनी मुश्किलों के बाद भी बेनेगल ने हार नहीं मानी। बेनेगल ने अमूल के संस्थापक और भारत में ‘श्वेत क्रांति’ के जनक कहे जाने वाले वर्गीज कुरियन को अपनी तकलीफ सुनाई। इस पर कुरियन ने तुरंत बेनेगल को सुझाव दिया कि वह अमूल को-ऑपरेटिव सोसाइटी के पांच लाख किसानों से संपर्क करें और उन्हें दो-दो रुपए देने के लिए राजी करें ताकि फिल्म बनाने के लिए जरूरी रकम का इंतजाम हो सके।

एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, अनु ने बताया कि कुरियन के सुझाव पर अमल करते हुए बेनेगल ने फिल्म के लिए पैसे जुटा लिए और फिर दर्शकों को ‘मंथन’ जैसी सफल फिल्म देखने को मिली। ‘सुहाना सफर’ शो के दौरान अनु ने बताया कि बेनेगल ने अमूल को-ऑपरेटिव सोसाइटी के पांच लाख किसानों को ‘मंथन’ के निर्माण का पूरा श्रेय भी दिया। जब ये फिल्म शुरू होती है तो पर्दे पर अंग्रेजी में लिखा दिखाई देता है, ‘गुजरात के पांच लाख किसानों की प्रस्तुति – मंथन’।

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