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अब मंडी में सलमान खान को भुनाने की कोशिश

क्या सलमान खान से कुछ महीने पहले जुड़ी रिश्ते की डोर सुखराम परिवार के लिए राजनीतिक सीढ़ी का काम करेगी? क्या यह महज संयोग हैं कि सुखराम के पोते आश्रय, जो वीरभद्र सिंह सरकार में मंत्री अनिल शर्मा के ज्येष्ठ पुत्र हैं, के राजनीति में पदापर्ण का एलान उनके छोटे भाई के विवाह की उस रिसेप्शन से महज एक पखवाड़ा पहले हुआ जिसमें सलमान खान उनके गृह नगर मंडी आने वाले थे? और क्या यह भी महज संयोग है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनके वफादार मंत्रियों ने इस चर्चित रिसेप्शन पार्टी में हिस्सा नहीं लिया?
Author May 27, 2015 09:39 am
सलमान खान मंडी में मंगलवार को अनिल शर्मा के घर के बाहर। (जनसत्ता फोटो: बीरबल शर्मा)

क्या सलमान खान से कुछ महीने पहले जुड़ी रिश्ते की डोर सुखराम परिवार के लिए राजनीतिक सीढ़ी का काम करेगी? क्या यह महज संयोग हैं कि सुखराम के पोते आश्रय, जो वीरभद्र सिंह सरकार में मंत्री अनिल शर्मा के ज्येष्ठ पुत्र हैं, के राजनीति में पदापर्ण का एलान उनके छोटे भाई के विवाह की उस रिसेप्शन से महज एक पखवाड़ा पहले हुआ जिसमें सलमान खान उनके गृह नगर मंडी आने वाले थे? और क्या यह भी महज संयोग है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनके वफादार मंत्रियों ने इस चर्चित रिसेप्शन पार्टी में हिस्सा नहीं लिया?

दरअसल मंडी में राजनीति की एक नई लड़ाई परदे के पीछे से सामने आने की तैयारी में है – सुखराम और वीरभद्र सिंह के परिवारों में। सुखराम इसी जंग का सामना अपने पोते की पत्नी के मुहंबोले भाई और बालीवुड के स्टार सलमान खान की लोकप्रियता से करना चाहते हैं! लड़ाई आश्रय और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पुत्र की है। वीरभद्र सिंह बेटे विक्रमादित्य सिंह को अपनी पत्नी, पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह के लोकसभा हलके रहे मंडी में स्थापित करना चाहते हैं।

पिछले महीनों में वीरभद्र सिंह के हरेक दौरे में विक्रमादित्य उनके संग रहे हैं। जाहिर है वीरभद्र सिंह राजनीति का पाठ ही उन्हें नहीं पढ़ा रहे बल्कि लोगों से उनका परिचय भी करा रहे हैं ताकि वे अपने पांव जमा सकें। एक पिता के रूप में उनका ऐसा करना गलत भी नहीं। हालांकि इस सारी कवायद से यह जाहिर हो रहा है कि इस पहाड़ी सूबे के बड़े राजनीतिक परिवारों के बीच रंजिश का दूसरा मोर्चा खुल रहा है। पहला वीरभद्र सिंह और भाजपा दिग्गज प्रेम कुमार धूमल (अनुराग ठाकुर) के बीच है ही।

सुख राम ने 1993 में जब अपने बेटे अनिल शर्मा को अचानक राजनीति में उतार दिया था तो सबको हैरानी हुई थी। अब इतिहास दोहराते हुए यही सुखराम के मंत्री बेटे अनिल शर्मा ने पुत्र आश्रेय को उतार कर किया है। सुखराम भले अपना सबसे बड़ा सपना – मुख्यमंत्री बनना – पूरा नहीं कर पाए, दो राय नहीं कि हिमाचल की राजनीति के वे चाणक्य रहे हैं। नहीं होते तो अपनी बनाई हिविकां पार्टी के अपने दो विधायकों को 1998 में भाजपा में शामिल करवाकर प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार नहीं बना पाते।

सुखराम ऐसा करके वीरभद्र सिंह और मुख्यमंत्री पद के बीच दीवार बन गए थे। और सुखराम ने ऐसा इसलिए किया था क्योंकि, जैसा कि उनका ही आरोप था, मंडी स्थित उनके आवास से बोरी में मिले कोई ढाई करोड़ रुपए जगजाहिर करने के पीछे ‘खेल’ वीरभद्र सिंह का था। इस खेल ने कांगे्रस से उनकी विदाई करवा दी और आज तक वे इससे जुड़े मामले में कचहरियों के चक्कर काट रहे हैं। संभवता राजनीति की यह रंजिश अब नई पीढ़ी की मार्फत सामने आने वाली है।

PHOTOS हिमाचल पहुंच सलमान ने कहा: ‘मैं यहां पर अपनी बहन आपको सौंपने आया हूं, जो कि मेरा दिल है।’ 

सलमान खान इस राजनीतिक जंग में नए पेंच हैं। या यूं कह लीजिए ‘स्टार मोहरे’ हैं। अगले चुनाव में सलमान विक्रमादित्य के मुकाबले आश्रेय के लिए प्रचार करते हैं , तो समझा जा सकता है ऊंट किस करवट बैठेगा। अनिल शर्मा भले पिता सुखराम जैसे पूरे सूबे में जाने वाले राजनेता न हों, सुखराम की विरासत और सलमान का गलैमर मिलकर राजनीति की किताब में कोई भी उलटफेर भरा पृष्ठ जोड़ सकते हैं।

वीरभद्र सिंह, जाहिर है इसे अपने बेटे के लिए शुभ संकेत नहीं मानते होंगे। यह सुखराम का ही कमाल था कि बेटे अनिल शर्मा को मंडी सदर से जितवाकर प्रदेश में और खुद मंडी लोकसबा सीट से जीतकर पीवी नरसिंहराव की सरकार में दूरसंचार जैसे अहम महकमे के मंत्री बन गए थे।

अनिल शर्मा केंद्र की राजनीति में जाना चाहते हैं जबकि बेटे आश्रेय को विधानसभा में जमाना चाहते हैं। वीरभद्र सिंह बेटे को मंडी में जमाना चाहते हैं। पार्टी दोनों की एक ही कांग्रेस है। जाहिर है अगले चुनाव तक राजनीति का यह खेल दिलचस्प मोड़ लेने वाला है। बस तिकोन के रूप में सलमान सामने हैं।

बीरबल शर्मा

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