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हमारी याद आएगीः जब संजीव कुमार ने दो बार कराई गाने की शूटिंग

और कम खर्च में बनने वाली छोटी फिल्मों का दौर फिल्मजगत में हमेशा रहा है। 39 साल पहले आज ही के दिन (सात जुलाई 1978 को) बीआर चोपड़ा की संजीव कुमार, विद्या सिन्हा, रंजीता अभिनीत ‘पति पत्नी और वो’ प्रदर्शित हुई थी। किसी को उम्मीद नहीं थी कि यह फिल्म साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनेगी।
संजीव कुमार

संजीव कुमार
9 जुलाई, 1938, 6 नवंबर, 1985

कम समय और कम खर्च में कई मशहूर फिल्मों में काम करने वाले संजीव कुमार ने हर फिल्म में अपनी छाप छोड़ी। अजीब नियति थी कि उनके परिवार का कोई भी पुरुष सदस्य 50 साल से ज्यादा जिंदा नहीं रहा। संजीव कुमार का निधन भी 47 की उम में हो गया।

और कम खर्च में बनने वाली छोटी फिल्मों का दौर फिल्मजगत में हमेशा रहा है। 39 साल पहले आज ही के दिन (सात जुलाई 1978 को) बीआर चोपड़ा की संजीव कुमार, विद्या सिन्हा, रंजीता अभिनीत ‘पति पत्नी और वो’ प्रदर्शित हुई थी। किसी को उम्मीद नहीं थी कि यह फिल्म साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनेगी।
इस फिल्म की कहानी बीआर चोपड़ा की पत्नी प्रकाश चोपड़ा ने लिखी थी। दरअसल, 1976 में पति के साथ दुनिया की सैर करने निकली प्रकाश को एक जापानी फिल्म देखने का मौका मिला था। फिल्म बॉस और उसकी सेक्रेटरी के बीच अफेयर पर आधारित थी। इसी से प्रभावित होकर उन्होंने ‘पति पत्नी और वो’ की कहानी लिखी थी, जिसकी पटकथा कमलेश्वर से लिखवाई गई थी।
बीआर चोपड़ा ‘गुमराह’, ‘वक्त’, ‘हमराज’ जैसी हिट फिल्में बना चुके थे। इस फिल्म के लिए उनके दिमाग में संजीव कुमार का नाम आया, जो उस समय व्यस्त और महंगे कलाकार थे। चोपड़ा ने उन्हें कहानी सुनाई और कहा कि वे ज्यादा मेहनताना नहीं दे सकेंगे। संजीव कुमार को कहानी पसंद आई । लिहाजा उन्होंने चोपड़ा से कहा कि वह अपने मेहनताने के बजाय ओवरफ्लो की रकम का 20 फीसद लेंगे। इसका मतलब था कि फिल्म हिट हो और वितरक अपनी लागत निकाल कर बाकी रकम का एक हिस्सा चोपड़ा को दें तो ही संजीव कुमार को कुछ मिलेगा। चोपड़ा सहमत हो गए।
संजीव कुमार ने शूटिंग के लिए एकमुश्त 30 दिनों की तारीखें दे दीं। फिल्म में एक गाना है, ‘ठंडे ठंडे पानी से नहाना चाहिए…’ संजीव कुमार पर कच्छे में यह गाना बाथरूम में फिल्माया जाना था। खाने के शौकीन संजीव कुमार को जब यह पता चला, तो वह डाइटिंग पर चले गए। उबली सब्जियां खाना शुरू कर दिया ताकि वजन कम हो जाए। मगर यह सब ज्यादा घंटों तक नहीं चला। नतीजा कि गाने की शूटिंग तक संजीव कुमार का वजन और बढ़ गया। जब गाना फिल्माया गया तो इसके रशेज देखकर संजीव परेशान हो गए और उन्होंने गाने की रीशूटिंग के लिए कहा। इस बार गाना घुटने तक लंबे कच्छे के बजाय लुंगी पहना कर फिल्माया गया। मगर इसका परिणाम देखकर संजीव कुमार ने कहा कि इससे अच्छा तो कच्छे वाला गाना ही था। लिहाजा वही रख लिया गया।
एक दिन एक निजी शो में जब यह फिल्म राजश्री प्रोडक्शन के मालिक ताराचंद बड़जात्या ने देखी तो उन्होंने बीआर चोपड़ा से कहा कि भारतीय समाज में विवाहेतर संबंधों की जगह नहीं है। इसलिए यह फिल्म विफल होगी। सात जुलाई, 1978 को फिल्म रिलीज हुई तो कारोबार बहुत मंदा था। मगर वक्त बीतने के साथ यह साल की सबसे ज्यादा कमाई वाली फिल्म बन गई। बीआर चोपड़ा ने संजीव कुमार को ओवरफ्लो का 20 फीसद दिया तो वह कहने लगे कि यह रकम मेरे उस मेहनताने से बहुत ज्यादा है जो आमतौर पर मैं लेता हूं।

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