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‘एनएच10’ फ़िल्म समीक्षा: नायिका की फ़िल्म

निर्देशक- नवदीप सिंह, कलाकार- अनुष्का शर्मा, नील भूपलम, दर्शन कुमार, दीप्ति नवल। पिछले दिनों रानी मुखर्जी की एक फिल्म आई थी, ‘मर्दानी’। उसी को याद करते हुए कह सकते हैं कि ‘एनएच 10’ का एक और नाम हो सकता है, ‘एक और मर्दानी अनुष्का शर्मा’। फर्क यही है कि रानी मुखर्जी केंद्रित फिल्म एक महिला […]
Author March 15, 2015 09:57 am
NH10: निर्देशक- नवदीप सिंह, कलाकार- अनुष्का शर्मा, नील भूपलम, दर्शन कुमार, दीप्ति नवल। (फ़ोटो-बॉलीवुडहंगामा.कॉम)

निर्देशक- नवदीप सिंह, कलाकार- अनुष्का शर्मा, नील भूपलम, दर्शन कुमार, दीप्ति नवल।

पिछले दिनों रानी मुखर्जी की एक फिल्म आई थी, ‘मर्दानी’। उसी को याद करते हुए कह सकते हैं कि ‘एनएच 10’ का एक और नाम हो सकता है, ‘एक और मर्दानी अनुष्का शर्मा’। फर्क यही है कि रानी मुखर्जी केंद्रित फिल्म एक महिला पुलिस अधिकारी को लेकर थी और ‘एनएच 10’ में अनुष्का शर्मा एक कारपोरेट कंपनी में काम करनेवाली महिला हैं। लेकिन जिस तरह से सामाजिक अपराधियों से लड़ती हैं और एक-एक कर उनसे बदला लेती हैं वो बहादुरी वाला काम ही है।

‘एनएच 10’ का मतलब नेशनल हाईवे है जो दिल्ली को पंजाब के बाहरी इलाके से जोड़ता है। यह हरियाणा होते हुए दिल्ली और पंजाब को जाता है। यह फिल्म एक रोड मूवी भी है और साथ ही थ्रिलर भी। लेकिन पहले की थ्रिलर फिल्मों में और इसमें एक फर्क है। पहले वाली फिल्मों के केंद्र में हीरो यानी पुरुष होता था जो एक-एक कर उन लोगों से बदला लेता था जिसने उसके साथ या समाज के साथ कुछ गलत किया हो। यहां केंद्र में हीरोइन है यानी अनुष्का शर्मा। मीरा के किरदार में अनुष्का शर्मा की भूमिका वैसी ही है, जैसी कुछ हिंदी फिल्मों में अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र या विनोद खन्ना की हुआ करती थी। कह सकते हैं कि ‘एनएच 10’ महिला सशक्तीकरण के दौर की फिल्म है और इसकी केंद्रीय महिला चरित्र यानी हीरोइन खलनायकों का सफाया करती है। जमाना किस तरह बदल रहा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नील भूपलम का किरदार कुछ वैसा ही है जैसा पहले भी और आज भी हीरोइनों का हुआ करता है। यानी फिल्मों में गुंडों के साथ निपटने के दौरान या तो लगभग मूक दर्शक बने रहना या असहाय महसूस करना।

मीरा (अनुष्का) एक कॉरपोरेट कंपनी में ऊंचे पद पर है। मीरा की शादी अर्जुन (नील भूपलम) नाम के एक शख्स के साथ हुई है जिसके बड़े लोगों के साथ संपर्क हैं। मीरा के साथ गुड़गांव में एक हादसा होता है जिसमें कुछ गुंडे उसे कार में अकेले जाते वक्त अगवा करने की कोशिश करते हैं। लेकिन अपनी बहादुरी से वह बच जाती है। पुलिस के कहने पर मीरा अपनी सुरक्षा के लिए एक रिवाल्वर भी खरीदती है। उसके बाद मीरा का जन्मदिन मनाने अर्जुन उसे दिल्ली-गुड़गांव के बाहर ले जाता है और रास्ते पर यानी नेशनल हाईवे 10 पर दोनों टकराते हैं एक औरत से, जो मीरा से कहती है कि उसे बचा ले क्योंकि उसके परिवार वाले उसके पति और उसकी जान के पीछे पड़े हैं। और यहीं से शुरू होता है वह हिस्सा जिस पर पूरी फिल्म टिकी है और जो बताती है कि किस तरह हरियाणा में इज्जत के नाम पर लड़कियों की हत्या की जाती है और इसके पीछे पूरा परिवार होता है। भाई भी, रिश्तेदार भी और यहां तक कि मां भी। मीरा और अर्जुन इस हत्या के चश्मदीद गवाह हैं इसलिए उन्हें मारने की कोशिशें भी होती हैं। स्थानीय पुलिस भी इन हत्यारों से मिली हुई है। मीरा किस तरह इनसे बचती है और कैसे उनका सफाया करती है, इसी बिंदु पर पूरी फिल्म टिकी है।

फिल्म महिला केंद्रित जरूर है लेकिन हिंसा और खून-खराबे से भरी हुई भी। निर्देशक ने अगर कुछ नया सोचा है तो सिर्फ इतना ही कि हीरो की जगह हीरोइन को मुख्य चरित्र बना दो। मगर इतने भर से महिला सशक्तीकरण नहीं हो जाता। सोच में नई समझ भी चाहिए और यही वह पहलू है जो इसे एक बहुत अच्छी फिल्म नहीं बनने देता। बेशक अनुष्का शर्मा को इस फिल्म का फायदा मिलेगा। वैसे इस फिल्म की निर्माताओं में वे भी एक हैं। यह कहा जा सकता है कि इसी वजह से उन्होंने इस फिल्म में पैसा लगाया होगा कि उसमें हीरोइन ही हीरो है। नील भूपलम की भूमिका थोड़ी देर बाद हाशिए पर चली जाती है। जहां तक दर्शन कुमार का प्रश्न है अपने हाव-भाव से वे अपनी भूमिका में जमते हैं लेकिन उनका उच्चारण हरियाणवी नहीं है इसलिए उनका किरदार ठीक से जम नहीं पाता। जो लोग फिल्मों में मर्दानियों को देखना चाहते हैं उन्हें यह फिल्म अच्छी लगेगी।

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