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मुगल-ए-आजम: शूटिंग में इस्तेमाल हुए थे 2 हजार ऊंट और 4 हजार घोड़े, असली सैनिकों ने निभाया था रोल

यह फिल्म एक फिल्म होने से ज्यादा इस फिल्म के डायरेक्टर के. आसिफ का एक जुनून था, एक जिद थी जिसे सनक भी कह सकते हैं। तभी तो इस फिल्म को बनने में न सिर्फ 17 साल लग गए बल्कि इसके निर्माण में पानी की तरह रुपए बहाए गए।
Author नई दिल्ली | July 7, 2017 15:52 pm
फिल्म के डायरेक्टर के. आसिफ ने अपनी पूरी जिंदगी में सिर्फ तीन फिल्में बनाई थीं जिनमें ‘मुगले आजम’ दूसरी फिल्म थी।

‘मुग़ल-ए-आजम’ बॉलीवुड के इतिहास की सबसे बड़ी फिल्मों में गिनी जाती है। बात चाहे इस फिल्म को बनने में लगने वाले समय की हो, इसकी शूटिंग में आने वाली चुनौतियों की हो, फिल्म की रिलीज को लेकर दिक्कतों की हो या फिर इस की रिलीज के बाद सिनेमाघरों में उमड़ी भीड़ की हो, हर मोर्चे पर इस फिल्म से जुड़ी कोई न कोई दिलचस्प कहानी जरुर है। यह फिल्म एक फिल्म होने से ज्यादा इस फिल्म के डायरेक्टर के. आसिफ का एक जुनून था, एक जिद थी जिसे सनक भी कह सकते हैं। तभी तो इस फिल्म को बनने में न सिर्फ 17 साल लग गए बल्कि इसके निर्माण में पानी की तरह रुपए बहाए गए। यह फिल्म उस दौर के सबसे महंगी फिल्म के तमगे से नवाजी जा चुकी है।

‘मुगल-ए-आजम’ मुगल बादशाह मोहम्मद जलालुद्दीन अकबर के बेटे सलीम और अनारकली की प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म थी जो पहले 1940 में रिलीज होने वाली थी जिसमें एक्टर सप्रू चंद्रमोहन और नरगिस ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। बाद में इस फिल्म को इसके नए स्टारकास्ट के साथ रिलीज किया गया जिसमें पृथ्वीराज कपूर, दिलीप कुमार और मधुबाला शामिल थे। फिल्म से जुड़े कई दिलचस्प किस्से हैं। आज हम उन्हीं किस्सों की चर्चा करेंगे।

1. फिल्म के डायरेक्टर के. आसिफ ने अपनी पूरी जिंदगी में सिर्फ तीन फिल्में बनाई थीं जिनमें ‘मुगले आजम’ दूसरी फिल्म थी। उनकी एक और फिल्म अभी रिलीज नहीं हुई थी तभी आसिफ का इंतकाल हो गया।

2. 17 साल में पूरी होने वाली इस फिल्म के युद्ध दृश्यों में तकरीबन 2000 ऊंट और 4000 घोड़ों का इस्तेमाल किया गया था। इन युद्धों में शामिल सैनिकों में अधिकांश भारतीय सेना के सिपाही थे।

3. फिल्म के एक गाने ‘जब प्यार किया तो डरना क्या’ की शूटिंग में ही 10 करोड़ रुपए लगे थे। इस गाने को मशहूर संगीतकार नौशाद ने संगीतबद्ध किया था और लता मंगेशकर ने इसे आवाज दी थी। इस गाने के बोल को नौशाद ने 105 रि-राइट्स के बाद फाइनल किया था।

4. फिल्म के एक अन्य गाने ‘ऐ मोहब्बत जिंदाबाद’ के कोरस में तकरीबन 100 सिंगर्स ने हिस्सा लिया था। इस गाने को मोहम्मद रफी ने आवाज दी थी।

5. फिल्म में उस्ताद बड़े गुलाम अली खां साहब को तानसेन की आवाज के लिए बड़ी मुश्किल से मनाया गया था। इसके लिए उन्हें उस समय 25000 रुपए का मेहनताना दिया गया था जबकि मोहम्मद रफी का मेहनताना उस समय 300 रुपए था।

6. के.आसिफ ने फिल्म में जोधाबाई के लिए नकली मोतियों का इस्तेमाल करने से सिर्फ इसलिए इंकार कर दिया था क्योंकि कांच के मोती जब जमीन पर गिरते हैं तो आवाज नहीं होती है।

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