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Sarabjit Movie Review: ब​हुत कुछ कहती हैं ऐश्वर्या की आंखें

दलबीर के रोल में ऐश्वर्या अपने चेहरे से अदाकारी के जौहर दिखाती हैं। हर सीन में ऐश्वर्या की आंखें ब​हुत कुछ कहती हैं। मसाला फिल्मों के करियर के बीच ऐश्वर्या की ये परफॉर्मेंस काबिलेतारीफ है।
Author नई दिल्ली | October 7, 2016 10:47 am
Sarabjit Movie Review: इस फिल्म को कुछ काल्पनिक सीन जोड़कर और रोचक बनाया जा सकता था। फिल्म की पटकथा में कुछ पाकिस्तान विरोधी तत्व हैं लेकिन उनपर पाकिस्तानी लोगों की दरियादिली भारी पड़ती है।

ऐश्वर्या राय बच्चन स्टारर ‘सरबजीत’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। निर्देशक उमंग कुमार की इस फिल्म में सरबजीत सिंह की कहानी दिखाई गई है, जो गलती से भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पार कर गया था। जिसके बाद उसे भारतीय जासूस समझकर जेल में डाल दिया गया। फिल्म में सरबजीत का किरदार रणदीप हूडा ने निभाया है जबकि उनकी बहन दलबीर कौर का रोल ऐश्वर्या ने अदा किया है। रिचा चड्ढा, सरबजीत की पत्नी सुखप्रीत के रोल में हैं।

असल जिंदगी में सरबजीत की बहन ने अपने भाई को वतन वापस लाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। फिल्म में दलबीर के रोल में ऐश्वर्या अपने चेहरे से अदाकारी के जौहर दिखाती हैं। हर सीन में ऐश्वर्या की आंखें बहुत कुछ कहती हैं। अपने मसाला फिल्मों के करियर के बीच ऐश्वर्या की ये परफॉर्मेंस काबिलेतारीफ है।

करीब 2 घंटे 12 मिनट की ये फिल्म शुरू होती है बॉर्डर किनारे बसे एक गांव से, जहां सरबजीत और उसकी बीवी सुखप्रीत रहते हैं। उनके दो मासूम बच्चे हैं और सरबजीत के पिता भी उन्हीं के साथ रहते हैं। अपने भाई को बेहद प्यार करने वाली दलबीर, अपने पति को छोड़कर मायके लौट आती है। नशे में बॉर्डर पार करने के बाद जब सरबजीत को जेल में डाल दिया जाता है, तब दलबीर फट पड़ती है। गुस्से में अपनी सिलाई मशीन को फेंकती ऐश्वर्या को देखकर आपको उनकी अभिनय क्षमता का अंदाजा हो जाएगा। वो सत्ता के गलियारों में अपने भाई की बेगुनाही साबित करने के लिए भटकती है, हर वक्त भारत पाकिस्तान के बीच अमन की बात करती है।

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दूसरी तरफ, सरबजीत पूरी तरह टूट जाता है। उसका गठीला बदन और तेज दिमाग परिस्थितियों के आगे हार मान जाता है। आखिर में उसे पछतावा होता है कि वो गलत समय पर गलत जगह मौजूद था। फिल्म भले ही सरबजीत की कहानी बयान करती हो, लेकिन ऐश्वर्या का किरदार कहानी को आगे बढ़ाता है। फिल्म के दूसरे हाफ में रणदीप हूडा की एक्टिंग के मामले में खानापूर्ति करते नजर आते है।

फिल्म को मेलोड्रामा बनाने की भरपूर कोशिश की गई है। हालांकि इस फिल्म को कुछ काल्पनिक सीन जोड़कर और रोचक बनाया जा सकता था। फिल्म की पटकथा में कुछ पाकिस्तान विरोधी तत्व हैं लेकिन उनपर पाकिस्तानी लोगों की दरियादिली भारी पड़ती है। लेखकों ने सरबजीत की किस्मत को भारत में आतंकवाद से जोड़ने की कोशिश की है, लेकिन निर्देशक उसे पर्दे पर खूबसूरती से नहीं उभार सके।

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फिल्म के कुछ डायलॉग समझ से परे हैं। कहानी को वास्तविक दिखाने के लिए फिल्म के ज्यादातर डायलॉग पंजाबी में रखे गए हैं, वो भी बिना किसी सबटाइटल के। हूडा हरियाणा और रिचा दिल्ली की होने की वजह से पंजाबी टेस्ट बरकरार रख पाते हैं लेकिन ऐश्वर्या जगह-जगह गलत उच्चारण करती हैं। उमंग ने 2014 में मैरीकॉम फिल्म से निर्देशन की शुरुआत की थी।

रिचा चड्ढा के पास फिल्म में करने को कुछ भी नहीं है। रणदीप हूडा का आधे से ज्यादा वक्त जेल में पागल कैदी की तरह बीततता है, लेकिन उनकी आंखें देखकर आपको दया आएगी। पूरी फिल्म एक तरह से ऐश्वर्या राय बच्चन पर निर्भर है जिन्होंने अपनी पिछली फिल्म ‘जज्बा’ से सबको प्रभावित किया था। लेकिन क्या सरबजीत को भी जज्बा जैसी सफलता मिलेगी?

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